
स्वतंत्रता दिवस पर राजधानी के आसमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से डिजाइन की जाने वाली पतंगें उड़ती नजर आएंगी, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर का पराक्रम से लेकर इन्फोग्राफिक्स तक उकेरे जा रहे हैं। पतंग का ढांचा, बांस, कागज और उड़ाने का तरीका भले ही पारंपरिक रहेगा, लेकिन उस पर बनी तस्वीर अब नई तकनीक से तैयार की गई है।
ग्राहक मोबाइल पर अपनी पसंद का डिजाइन बताते हैं और एआई की मदद से कुछ ही समय में उसके कई विकल्प तैयार हो जाते हैं। इनमें से पसंद आने वाले डिजाइन को प्रिंट कर पतंग के कागज पर लगाया जाता है। इसके बाद पतंग बनाने का बाकी काम कारीगर अपने हाथों से ही पूरा करते हैं।
एआई से बने डिजाइन आसमान में बढ़ाएंगे रौनक : पतंग कारोबारियों के अनुसार, एआई वाली पतंगों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही विषय पर कई तरह के डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। अगर कोई ग्राहक सैनिक की तस्वीर वाली पतंग चाहता है तो उसे सामान्य तस्वीर, कार्टून, डिजिटल आर्ट या ग्राफिक्स के रूप में डिजाइन कराया जा सकता है। तिरंगे के लिए भी अलग-अलग डिजाइन तैयार हो रहे हैं।
कहीं पतंग पर पूरा तिरंगा बनाया जा रहा है तो कहीं तिरंगे के बीच सैनिक की तस्वीर दिखाई जा रही है। कुछ पतंगों पर लाल किले को प्रमुखता दी गई है। कुछ डिजाइन में भारत माता को दिखाया गया है। इस समय देशभक्ति से जुड़े डिजाइन सबसे ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं। युवा पारंपरिक फूल-पत्तियों और सामान्य चित्रों के बजाय कुछ नया चाहते हैं।
पतंग उड़ाएं, लेकिन सुरक्षा का रखें ध्यान…
स्वतंत्रता दिवस पर पतंगबाजी का उत्साह रहता है, पर मांझे से चोट का खतरा भी है। डॉक्टरों के अनुसार, पतंग उड़ाते समय तेज धार वाले मांझे का उपयोग न करें। ऐसी डोर से हाथ, उंगलियों, गर्दन और चेहरे पर गहरे कट लग सकते हैं। पतंग हमेशा खुली और सुरक्षित जगह पर ही उड़ाएं। सड़क, बिजली की लाइन और भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहना चाहिए। यदि मांझे से मामूली कट लगे तो घाव को साफ पानी से धोएं।
साफ कपड़े या गॉज से हल्का दबाव बनाकर खून रोकने का प्रयास करें। घाव को साफ रखने के बाद उसे ढक दें। गहरे कट या लगातार खून बहने पर तुरंत अस्पताल जाएं। गर्दन, आंख, चेहरे या संवेदनशील हिस्से में चोट पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। घाव में फंसी डोर या कोई चीज जबरदस्ती न खींचें।



