
कांग्रेस कार्यसमिति ने बुधवार को 1937 के अपने सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय के प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया। इसके तहत पार्टी के सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। भाजपा ने कांग्रेस के इस फैसले को बेहद निंदनीय बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इस फैसले से कांग्रेस के स्वतंत्रता संग्राम की कथित ‘एकमात्र उत्तराधिकारी’ होने के दावे पर सवाल खड़ा हो गया है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने यह फैसला लेकर साबित कर दिया है कि उसके लिए पार्टी देश से ऊपर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान, संसद और देश से ऊपर अपने पार्टी प्रस्ताव को मान रही है। त्रिवेदी ने यह भी आरोप लगाया कि वंदे मातरम् के पूरे संस्करण को लेकर कांग्रेस का मौजूदा रुख उसके 1937 के फैसले जैसा ही है। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय बताया।
1937 के फैसले का जिक्र क्यों हो रहा है?
भाजपा ने कांग्रेस के मौजूदा फैसले को उसके 1937 के प्रस्ताव से जोड़कर निशाना साधा है। त्रिवेदी के मुताबिक, उस समय कांग्रेस के सर्वोच्च निर्णयकारी निकाय ने वंदे मातरम् को लेकर फैसला किया था। अब कांग्रेस कार्यसमिति ने उसी प्रस्ताव का पालन करने की बात कही है। भाजपा का आरोप है कि आज भी कांग्रेस उसी रुख पर कायम है, जबकि संसद की ओर से वंदे मातरम् के पूरे संस्करण के गायन को लेकर कानून बनाए जाने की बात कही गई है।
भाजपा ने कांग्रेस को नई मुस्लिम लीग क्यों कहा?
त्रिवेदी ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए उसे आज की ‘नई मुस्लिम लीग’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम लीग ने 1931 और 1937 में वंदे मातरम् के पूरे संस्करण का विरोध किया था। भाजपा प्रवक्ता का आरोप है कि कांग्रेस ने उसी रुख को दोहराकर अपने लिए गंभीर सवाल खड़े कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने पुराने फैसले को बदलने या उस अध्याय को सुधारने के बजाय उसे फिर अपना लिया है।
क्या वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच विवाद बढ़ेगा?
वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव अब और तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस का फैसला ऐसे समय आया है जब भाजपा उसके नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण नहीं गाने को लेकर सवाल उठा रही थी। भाजपा ने इसे कांग्रेस की देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति निष्ठा से जोड़ दिया है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की नीयत पर क्या सवाल उठाया?
त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस के फैसले से उसकी देश के प्रति निष्ठा पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने संविधान और देश से ऊपर अपने राजनीतिक प्रस्ताव को प्राथमिकता दी है। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम पर अपना ‘एकमात्र अधिकार’ जताने के दावे को खुद कमजोर कर दिया है। इस बयान के साथ भाजपा ने वंदे मातरम् के मुद्दे को सीधे कांग्रेस की राष्ट्रवादी राजनीति से जोड़ दिया है।




