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यूक्रेन-रूस जंग पर भारत का रुख साफ:जयशंकर बोले- बातचीत और कूटनीति ही रास्ता; क्या निकलेगा शांति का रास्ता? – Ukraine Russia War India Jaishankar Kyiv Peace Talks Black Sea Trade Zelenskyy

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भारत यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने के लिए ‘किसी भी तरह की हर मदद’ देने को तैयार है। यह युद्ध अब पांचवें साल में पहुंच गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को यह बात कही।

जयशंकर ने कीव में अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा के साथ कई मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की। इसके बाद दोनों ने संयुक्त रूप से प्रेस को बयान दिया। जयशंकर ने कहा, भारत लगातार यह कहता रहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं है। समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे। 

क्या युद्ध खत्म करने पर हुई बात?

उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ दो दिन पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की थी। यह मुलाकात बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से अलग हुई थी। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वहां कहा था कि अब लगातार जारी युद्ध को खत्म करने का समय आ गया है।

उन्होंने कहा, संघर्ष के हर गुजरते दिन का मतलब ज्यादा मौतें और ज्यादा तबाही है। जाहिर तौर पर इसमें शामिल पक्षों को ही रास्ता निकालना होगा। लेकिन अगर भारत किसी भी तरह कोई मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं। 

भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिये रूस-यूक्रेन संघर्ष खत्म करने की अपील करता रहा है।इसके बाद जयशंकर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की। उन्होंने उन्हें यूक्रेन के विदेश मंत्री के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

जयशंकर ने कहा, हमारी बातचीत का मुख्य मुद्दा जारी संघर्ष को खत्म करने के तरीकों पर था। जयशंकर ने इससे पहले कहा था कि वह राष्ट्रपति जेलेंस्की तक प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बधाई और शुभकामनाएं पहुंचाएंगे।

जेलेंस्की ने भारत के रुख पर क्या कहा?

जेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वह ‘इस अन्यायपूर्ण युद्ध को खत्म करने की भारत की प्रतिबद्धता के लिए आभारी हैं’। उन्होंने कहा, निश्चित रूप से यह युद्ध का समय नहीं होना चाहिए। शांति जरूरी है। भारत का यह स्पष्ट रुख है। 

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि दुनिया की दूसरी बड़ी शक्तियां भी स्पष्ट रुख अपनाएंगी। वे भी कहेंगी कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए। एक भरोसेमंद शांति कायम होनी चाहिए। उन्होंने कहा, बेशक, हमने काला सागर की स्थिति पर भी चर्चा की। इसमें आम लोगों के लिए इस्तेमाल होने वाले जहाजों को मौजूदा खतरों की बात भी शामिल है। 

उन्होंने कहा कि इस बात पर दोनों सहमत हैं कि उन इलाकों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति रोकना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है, जहां यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है। वहां लोग समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के बंदरगाहों को रोकने के रूस के कदम, यूक्रेन के खाद्य गलियारे और सामान की आपूर्ति को रोकने की कोशिशों से वैश्विक संबंधों में बड़ी बाधा पैदा हो रही है।

काला सागर में क्या हो रहा है?

उन्होंने कहा, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब भारतीय मंत्री कीव में थे, तब रूस ने एक बार फिर जेट इंजन वाले ‘शाहेद’ ड्रोन लॉन्च किए। जेलेंस्की ने कहा, हमारी लड़ाकू विमान इकाइयों की वजह से प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा। यूक्रेन के लड़ाकू विमान ही इनमें से ज्यादातर ड्रोन को मार गिराते हैं। 

जयशंकर ऐसे समय कीव पहुंचे हैं, जब मॉस्को और कीव के बीच जंग बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा ‘द्विपक्षीय उद्देश्य’ से है। लेकिन इससे भी अहम बात यह है कि यह 2022 से जारी युद्ध के बड़े संदर्भ में हो रही है। 

ये भी पढ़ें: यूक्रेन के राष्ट्रपति से मिले जयशंकर: रूस से तेल खरीदने पर दो टूक जवाब; बोले- भारत के फैसलों का सम्मान जरूरी

जयशंकर ने कहा कि सिर्फ दो दिन पहले कीव में हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की भी मौत हुई है। उन्होंने कहा, हम हर जान जाने पर दुख जताते हैं। हर प्रभावित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। 

व्यापारिक जहाजों पर हमलों को लेकर जयशंकर ने क्या कहा?

भारत पिछले कुछ हफ्तों में काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हुए कई हमलों को लेकर भी चिंतित रहा है। जयशंकर ने पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन के विदेश मंत्री के साथ हुई अपनी कई मुलाकातों को याद किया। उन्होंने कहा, आज हमारी बातचीत बहुत स्वतंत्र और बहुत खुली रही। उन्होंने कहा कि बातचीत में युद्ध से जुड़े कुछ खास मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इनमें सबसे अहम मुद्दा व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमले थे।

उन्होंने कहा, भारतीय नाविक कई देशों के ध्वज वाले जहाजों पर काम करते हैं। वे भी दुर्भाग्य से इन घटनाओं में हताहत हुए हैं।  जयशंकर ने कहा कि जहाजों पर पड़ रहा असर वैश्विक दक्षिण के कई देशों को भी अलग-अलग तरह से प्रभावित कर रहा है। इससे ईंधन, खाद और खाद्य सामग्री की कमी हो रही है। उन्होंने कहा, इसलिए हमने इन और इससे जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

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