
मुंबई में अंधेरी में बॉलीवुड फिल्म ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर एक कारोबारी के दफ्तर पर फर्जी छापा मारकर 1 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस सनसनीखेज मामले में फर्जी अधिकारियों के साथ आयकर विभाग के असली इंस्पेक्टर और टैक्स असिस्टेंट भी शामिल थे। अंधेरी पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड पूर्व ड्राइवर, तीन महिलाओं और आयकर विभाग के दो कर्मचारियों समेत सभी 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए रची साजिश
डीसीपी दत्ता नलावड़े के अनुसार, यह पूरी साजिश पुरानी रंजिश और बदले की भावना से रची गई थी। शिकायतकर्ता राजकुमार कंडासामी (49) अंधेरी में अपना दफ्तर चलाते हैं। आरोपी संतोष उदय खोपटकर (37) पहले उनके यहां ड्राइवर था, जिसे विवाद के बाद 6 महीने का वेतन दिए बिना निकाल दिया गया था। इसी का बदला लेने और पैसे ऐंठने के लिए संतोष ने दफ्तर की अंदरूनी जानकारियों का फायदा उठाया और कुछ पुरुषों, महिलाओं तथा आयकर विभाग के दो अधिकारियों के साथ मिलकर यह पूरी साजिश रची।
ऐसे दिया घटना को अंजाम
पिछले सप्ताह घटना वाले दिन आरोपी फर्जी और असली सरकारी पहचान पत्र दिखाकर दफ्तर में घुसे और कर्मचारियों पर आयकर व क्राइम ब्रांच की कार्रवाई का खौफ पैदा किया। आरोपियों ने कारोबारी राजकुमार कंडासामी और उनकी पत्नी का अपहरण करने की कोशिश की। कोई बाहर संपर्क न कर सके, इसलिए उन्होंने दफ्तर के दरवाजे बंद कर दिए और वहां मौजूद कारोबारी, उनकी पत्नी तथा 10 कर्मचारियों के मोबाइल फोन छीन लिए। इसके बाद जेल भेजने और भारी जुर्माने का डर दिखाकर कार्रवाई से बचाने के एवज में 1 करोड़ रुपये की मांग की।
आरोपियों के चंगुल से किसी तरह निकलकर पीड़ित कारोबारी अंधेरी पुलिस स्टेशन पहुंचे। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 61(2), 204, 205, 333, 140(2), 127(1), 351(2) और 308(4) के तहत मामला दर्ज किया। टेक्निकल सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले मुख्य साजिशकर्ता संतोष खोपटकर के अलावा विनय रमेश मोरे (37), प्रेम किसन सबनानी (50), प्रज्ञा हरीश माईन (27), रेशमा शामराव वारंग (41) और सबीना हाफीज शेख (48) को गिरफ्तार किया।
पूछताछ के दौरान सामने आया कि इस फर्जी रेड के वक्त आयकर विभाग में तैनात इंस्पेक्टर सुरेश महावीरप्रसाद मिश्रा (57) और टैक्स असिस्टेंट सुनील मनोहर गोरे (59) भी दफ्तर में मौजूद थे। साजिश में संलिप्तता की पुष्टि होने पर पुलिस ने 10 सितंबर को इन दोनों सरकारी कर्मचारियों को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही वारदात में शामिल जितु उर्फ जितेंद्र नामदेव मोरे (52) और अशोक विठोबा शिंदे (57) को भी गिरफ्त में लिया गया, जिससे गिरोह के सभी 10 सदस्य पुलिस की गिरफ्त में आ गए।




