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यूएन:’ग्लोबल साउथ की वैश्विक चुनौतियां ज्यादा, लेकिन हम ही फैसले नहीं ले सकते’, जयशंकर ने किसे सुनाई खरी-खरी? – Un: There Should No Arbitrariness Regarding Oil Prices Key Issues Raised By Jaishankar At The United Nations.

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार  को बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक चुनौतियों, जलवायु संबंधी झटकों और बहुपक्षीय व्यवस्था पर बढ़ते दबाव से निपटने के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के बीच ज्यादा सहयोग का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों पर मनमानी नहीं होनी चाहिए। 

81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ देशों की बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि वैश्विक स्थिति में टकराव का बढ़ना, सप्लाई चेन और व्यापार पर दबाव, निवेश के बिखरे हुए प्रवाह, कर्ज का बढ़ता जोखिम और विकास के लिए अपर्याप्त फंड जैसी चुनौतियां शामिल हैं।

एस. जयशंकर ने क्या कहा? 

उन्होंने कहा, ‘आज वैश्विक संकट में ग्लोबल साउथ भले ही सबसे आगे हो, लेकिन निर्णय लेने में वह सबसे पीछे है। अलग दौर के लिए बनाई गई संस्थाएं आज भी उसी दौर के सत्ता-ढांचे को ही दिखाती हैं। ग्लोबल साउथ को उन फैसला लेने वाले ढांचों का हिस्सा बनने की जरूरत है जो हमारे भविष्य से सीधे जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।’

ग्लोबल साउथ के समान सोच वाले देशों और सहयोगियों की एक हाई-लेवल मीटिंग में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सात बिंदुओं पर बात की। 


  • सप्लाई चेन, फाइनेंस या कनेक्टिविटी में ‘चोक पॉइंट्स’ (रुकावट वाली जगहों) को स्वीकार या वैध नहीं मानना चाहिए।

  • एनर्जी सिक्योरिटी विकास के केंद्र में है। राजनीतिक फायदे के लिए इसकी उपलब्धता और कीमतों में हेर-फेर नहीं होनी चाहिए।

  • फूड सिक्योरिटी एक साझा लक्ष्य है। इससे जुड़ी चुनौतियों, खासकर अनाज और फर्टिलाइजर की सप्लाई से जुड़ी समस्याओं का तेजी से समाधान करना चाहिए।

  • सनिष्पक्ष आर्थिक और व्यापारिक तौर-तरीके सुनिश्चित करना जो हमारी उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाएं। साथ ही औद्योगीकरण के अधिकार से हमें वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

  • समुद्री इलाकों (मैरीटाइम कॉमन्स) को सुरक्षित रखना, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना और नाविकों व कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा की गारंटी देना जरूरी है।

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आ रहे बदलावों के कारण नई तरह की दूरियां या विभाजन नहीं बनने चाहिए।

  • ग्लोबल साउथ को उन फैसलों को लेने वाले ढांचों का हिस्सा बनना चाहिए जो हमारे भविष्य से सीधे जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।

भारत- सीईएलएसी का सालाना व्यापार कितने हुआ है? 

इसके साथ ही उन्होंने भारत और ‘कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन एंड कैरिबियन स्टेट्स’ (CELAC) के बीच मजबूत आर्थिक और विकास साझेदारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत- सीईएलएसी  व्यापार सालाना 50 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। भारत-सीईएलएसी विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछले दशक में भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है। इस दौरान देश की जीडीपी दोगुनी से अधिक हो गई है और विकास दर मजबूत बनी हुई है।

इसके साथ ही उन्होंने इस क्षेत्र के साथ भारत के विकास सहयोग का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा, ‘चाहे कैरिबियन में लोगों की आजीविका को सहारा देने वाले प्रोजेक्ट हों, हरिकेन मेलिसा से हुई तबाही से निपटने में मदद हो, भूकंप के बाद वेनेजुएला भेजे गए मिलिट्री हॉस्पिटल हों या लैटिन अमेरिकी देशों को भेजी गई दवाइयां। भारत ने हमेशा अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल जरूरतमंदों की मदद के लिए किया है।’

‘संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हुए प्रगति चाहते हैं’

जयशंकर ने कहा, ‘भारत चिली के साथ प्रस्तावित सीईपीए, पेरू के साथ एफटीए और मर्कोसुर के साथ पीटीए के विस्तार के माध्यम से इस क्षेत्र के साथ मजबूत और संतुलित आर्थिक साझेदारी बनाने की कोशिश कर रहा है। हमारा उद्देश्य ऐसे ढांचे तैयार करना है जो पारस्परिक रूप से लाभकारी हों। हम एक-दूसरे की संवेदनशीलता और प्राथमिकताओं का ध्यान रखते हुए प्रगति चाहते हैं।’

भारत के विकास के रिकॉर्ड को उसकी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में एक महत्वपूर्ण ताकत बताते हुए, जयशंकर ने कहा कि सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाने की आवश्यकता है। भारत सीईएलएसी को केवल एक क्षेत्रीय समूह के रूप में नहीं, बल्कि अधिक प्रतिनिधि, संतुलित और समावेशी वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है। हमें एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखना है। हम एक-दूसरे को बहुत कुछ दे सकते हैं। और सबसे बढ़कर, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भविष्य को निर्धारित करने में ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज सुनिश्चित करने में हमारा साझा हित है।

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