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निर्वाचन आयोग ने पिछले फैसलों की समीक्षा की:एसआईआर में सुनवाई और फॉर्म के नियम बदले; क्यों? – Ec Reviews Action Taken On Decisions Announced Last Week

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निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पिछले हफ्ते लिए गए कई फैसलों की समीक्षा की है। इनमें से ज्यादातर फैसले मतदाता सूची के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने समीक्षा बैठक की। निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी बैठक में शामिल हुए।

विशेष गहन पुनरीक्षण में क्या बदला?

विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच निर्वाचन आयोग ने एक फैसला लिया है। अब लोगों को अपने एसआईआर के फॉर्म में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर सुनवाई के लिए निर्वाचन अधिकारियों के सामने पेश नहीं होना पड़ेगा।

नए मतदाताओं के फॉर्म में क्या बदलाव हुआ?

जिन राज्यों में एसआईआर पूरा हो चुका है, वहां नए मतदाताओं के लिए ऑनलाइन फॉर्म-6 में एक घोषणा नहीं होगी। इस घोषणा में माता-पिता का विवरण मांगा जाता था। यह विवरण पिछली मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ा था। मंगलवार को गैर-विशेष गहन पुनरीक्षण वाले राज्यों से भी यह घोषणा वाला फॉर्म हटा दिया गया।

आंध्र प्रदेश और मेघालय में कब आएगी अंतिम सूची?

निर्वाचन आयोग ने अलग से एक बयान जारी किया। इसमें बताया गया कि आंध्र प्रदेश और मेघालय में एसआईआर का कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया गया है। आंध्र प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची अब 16 अक्तूबर को जारी होगी। मेघालय में अंतिम मतदाता सूची 26 अक्तूबर को जारी होगी। पहले आंध्र प्रदेश में अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख 9 अक्तूबर थी। मेघालय में यह तारीख 21 अक्तूबर थी।

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फैसलों की दोबारा समीक्षा क्यों हुई?

यह फैसला निर्वाचन आयोग की ओर से कई कदमों की घोषणा के कुछ दिन बाद आया है। ये घोषणाएं पुनरीक्षण को लेकर उठी आपत्तियों के बाद की गई थीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पुनरीक्षण की कुछ प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी। इनमें मतदाता पंजीकरण के फॉर्म में किए गए बदलाव भी शामिल थे। मतदाता सूची के प्रबंधन वाले सॉफ्टवेयर के काम करने के तरीके को लेकर भी सवाल उठे थे।

26 सितंबर को पूरे निर्वाचन आयोग की बैठक हुई थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने कहा था कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े आदेशों को तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी।

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