आखिर NHAI ने टोल कैलकुलेशन का नियम क्यों बदला?
पहले ऐसे हाईवे सेक्शन, जहां पुल, सुरंग या एलिवेटेड रोड अधिक होती थी, वहां टोल की गणना मुख्य रूप से इन संरचनाओं की लंबाई के 10 गुना के आधार पर की जाती थी। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि इनका निर्माण और रखरखाव सामान्य सड़क की तुलना में ज्यादा महंगा होता है।
अब नए नियम में एक अधिकतम सीमा तय कर दी गई है, ताकि टोल की गणना हमेशा कम दूरी वाले फॉर्मूले के आधार पर हो और यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
नया टोल कैलकुलेशन फॉर्मूला क्या है?
संशोधित नियम के अनुसार अब टोल योग्य दूरी निकालने के लिए दो अलग-अलग गणनाएं की जाएंगी और जिससे कम दूरी निकलेगी, उसी के आधार पर टोल वसूला जाएगा।


नया फॉर्मूला
फॉर्मूला-1
संरचनाओं (ब्रिज, टनल, फ्लाईओवर, एलिवेटेड हाईवे) की कुल लंबाई × 10 + बाकी सामान्य सड़क की लंबाई
इसका मतलब क्या है?
अगर किसी हाईवे का बड़ा हिस्सा पुल, सुरंग या एलिवेटेड रोड है, तो उनकी लंबाई को 10 गुना माना जाएगा। और फिर सामान्य सड़क की लंबाई उसमें जोड़ दी जाएगी।
फॉर्मूला-2
पूरे हाईवे सेक्शन की कुल लंबाई × 5
इसका मतलब क्या है?
इस फॉर्मूले में पूरे हाईवे की कुल दूरी को पांच गुना माना जाएगा, चाहे उसमें कितनी भी संरचनाएं क्यों न हों।
जिस फॉर्मूले से कम दूरी निकलेगी, उसी पर टोल तय होगा।
इसका फायदा क्या होगा?
यात्रियों से हमेशा कम टोल योग्य दूरी के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। यानी पहले की तुलना में कई मामलों में टोल कम हो सकता है।




