नई दिल्ली: देशभर में प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से जारी छात्रों का विरोध प्रदर्शन समाप्त हो गया है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए हैं।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और समझौता
विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्रों के लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ छात्रों के प्रतिनिधियों की तीसरे दौर की वार्ता के बाद यह फैसला लिया गया।
सरकार ने आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज हुई FIRs वापस लेने का भरोसा दिया है तथा पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया है। इस आश्वासन के बाद छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर से अपना धरना खत्म करने का ऐलान किया।

नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों को संबोधित करते हुए परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की घोषणा की। इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के जनक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व प्रमुख एस. सोमनाथ और आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी समेत कई विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कमेटी परीक्षा एजेंसियों (NTA) के पुनर्गठन और पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था लागू करने का सुझाव देगी।
संसद में पेश होगा सख्त कानून
सरकार संसद के चालू सत्र में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश करने जा रही है। इस कानून के तहत पेपर लीक में शामिल दोषियों को कड़ी सजा, भारी जुर्माना और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का प्रावधान है।
सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन
छात्रों के समर्थन में 26 दिनों से अनशन पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अपना अनशन समाप्त कर दिया है। डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा है, जिसके बाद वे राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित कर लद्दाख लौटेंगे।






