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एचपीवी टीकाकरण ने पकड़ी रफ्तार:चार राज्यों में 100 फीसदी कवरेज: 80 लाख डोज लगीं; अब क्या है अगला लक्ष्य? – Gujarat, Up, Mp, Mizoram Achieve 100-pc Coverage As India Crosses 80l Hpv Vaccinations

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गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और मिजोरम ने एचपीवी टीकाकरण में अपने तय लक्ष्य की 100 फीसदी कवरेज हासिल कर ली है। बिहार, आंध्र प्रदेश और असम में भी 90 फीसदी से ज्यादा टीकाकरण हो चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

दूसरे राज्यों में कितना टीकाकरण हुआ?

कर्नाटक में 85 फीसदी से ज्यादा लड़कियों को टीका लगाया जा चुका है। छत्तीसगढ़, सिक्किम, केरल, तेलंगाना और ओडिशा में 60 फीसदी से ज्यादा टीकाकरण हुआ है।

यूपी में कितनी लड़कियों को टीका लगा?

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा लड़कियों को एचपीवी का टीका लगाया गया है। राज्य में 22 लाख से ज्यादा किशोरियों को टीका लग चुका है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी में अभियान शुरू होने के बाद से देशभर में एचपीवी वैक्सीन की 80 लाख से ज्यादा डोज दी जा चुकी हैं।

देश में कितने टीके लगे?

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी में अभियान शुरू होने के बाद से देशभर में एचपीवी टीके की 80 लाख से ज्यादा खुराक दी जा चुकी हैं।

एचपीवी टीकाकरण अभियान कब शुरू हुआ?

राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी में की थी। इस अभियान के तहत 14 साल की लड़कियों को एचपीवी टीके की एक खुराक मुफ्त दी जा रही है। टीका स्वेच्छा से लगाया जा रहा है। इसके लिए माता-पिता की सहमति जरूरी है। टीका सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर लगाया जा रहा है।

हर साल कितनी लड़कियों को फायदा मिलेगा?

भारत के रजिस्ट्रार जनरल के 2021 के अनुमान के मुताबिक, हर साल करीब 1.2 करोड़ लड़कियां 14 साल की उम्र में पहुंचती हैं। हर साल करीब इतनी लड़कियों को इस अभियान से फायदा मिलने की उम्मीद है।

अभियान की सफलता कैसे मिली?

मंत्रालय के मुताबिक, इस प्रगति के पीछे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मिलकर की गई कोशिश है। लोगों को लगातार जागरूक किया गया। जिला स्तर की स्वास्थ्य टीमों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। राज्यों ने अपने-अपने इलाकों के हिसाब से अलग तरीके अपनाए हैं। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के जरिये पात्र किशोरियों तक पहुंचने की कोशिश की गई। इसमें ग्रामीण और शहरी इलाके शामिल हैं। दूर-दराज और मुश्किल भौगोलिक क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया गया है।

टीके को लेकर भ्रम कैसे दूर किया जा रहा है?

अभियान में लोगों को सही जानकारी देने पर खास जोर दिया गया है। माता-पिता, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक और फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को इसमें जोड़ा गया है। इनके जरिये एचपीवी टीके को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर किया जा रहा है। टीके से जुड़ी गलत जानकारी का भी जवाब दिया जा रहा है।

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यू-विन से कैसे हो रही निगरानी?

अभियान में भारत के डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए यू-विन (U-WIN) प्लेटफॉर्म की मदद ली जा रही है। इससे अधिकारी जिला स्तर पर टीकाकरण की स्थिति देख सकते हैं। वे यह भी पता लगा सकते हैं कि कहां कमी रह गई है और किन लोगों को टीका नहीं लग पाया है। इसके आधार पर आगे की योजना बनाई जा रही है। संसाधनों को भी जरूरत के हिसाब से लगाया जा रहा है।

दुनिया में एचपीवी टीके का कितना अनुभव है?

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत का यह अभियान दुनिया के दूसरे देशों के अनुभव पर भी आधारित है। दुनियाभर में एचपीवी टीके की 80 करोड़ से ज्यादा खुराक दी जा चुकी हैं। इससे इसके इस्तेमाल और सुरक्षा को लेकर काफी वास्तविक अनुभव सामने आया है।

कितने देशों ने एचपीवी टीके को अपनाया?

मंत्रालय के मुताबिक, अभी 87 फीसदी उच्च-मध्यम आय वाले देशों ने एचपीवी टीके को अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। निम्न-मध्यम आय वाले 78 फीसदी देशों ने भी इसे अपने राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किया है। कम आय वाले देशों में 54 फीसदी देशों ने एचपीवी टीके को अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया है।

अभियान के तहत सभी टीकाकरण सत्र प्रशिक्षित मेडिकल अधिकारियों की निगरानी में होते हैं। ये सत्र सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित किए जाते हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों को 24 घंटे और सातों दिन चलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा गया है। जरूरत पड़ने पर टीकाकरण के बाद होने वाली दुर्लभ प्रतिकूल घटनाओं का उचित इलाज किया जा सकता है।

अब अभियान का फोकस क्या है?

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अभियान अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। अब बची हुई पात्र लड़कियों तक पहुंचने पर जोर है। मकसद यह है कि कोई भी पात्र लड़की इस अभियान से बाहर न रह जाए।

 

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