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खबर का असर:भोले की शरण में पहुंचे बच्चों की गुहार रंग लाई, कांवड़ लेकर घर लौटे तो डीएम ने स्कूल फीस माफ कराई – Impact Of The News: Dm Got School Fees Waived After Kanwar Pilgrim Returned Home

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फीस न भर पाने के कारण पढ़ाई छूटने पर भगवान शिव के भरोसे हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकले दिव्यांग दंपती के चार बच्चों की पुकार आखिरकार रंग ले आई। अमर उजाला में 11 अगस्त के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने वाली खबर का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बच्चों की फीस माफ करवाई है। उन्होंने चारों बच्चों को कलेक्ट्रेट कार्यालय बुलाकर दो-दो स्कूल ड्रेस, बैग, किताबों का सेट, पेंसिल बॉक्स, टिफिन और जूते-मोजे प्रदान किए हैं।

डीएम ने बताया कि साधना नगर पालिका इंटर कॉलेज कोसीकलां में पढ़ती है, जिसकी फीस पहले से माफ है। वहीं प्रेरणा की फीस भी माफ थी। शेष दो बच्चों, मुस्कान (6,800 रुपये) और शिवम (5,500 रुपये) की बकाया फीस स्कूल प्रबंधक से बात कर पूरी तरह माफ करवा दी गई है। आदेश दिए गए हैं कि भविष्य में भी इनसे कोई फीस नहीं ली जाएगी। उप जिलाधिकारी छाता, अखिलेश कुमार ने चारों मासूमों को गोद ले लिया है। अब वे इनकी आगे की पूरी पढ़ाई और देखभाल का जिम्मा संभालेंगे।

भोलेनाथ पर था अटूट भरोसा 

भरत सिंह का कहना है कि फीस न भर पाने और स्कूल से नाम कटने के दर्द से जूझ रहे बच्चों ने शिक्षा की आस में हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था। बच्चों का मानना था कि भोलेनाथ ही उनकी राह आसान करेंगे।

प्रशासनिक पहल के बाद बच्चों के चेहरों पर दोबारा पढ़ाई शुरू होने की खुशी साफ झलक रही है। जब अधिकारियों को हमारी मजबूरी और समस्या का पता चला, तो उन्होंने तुरंत हमारे घर आकर संपर्क किया। प्रशासन की मदद से हमारे बच्चों की स्कूल फीस माफ हो गई है और उन्हें ड्रेस, किताबें, बैग व पेन जैसी सभी सुविधाएं मिल गई हैं। हमें आवास योजना का लाभ और पहली किस्त भी मिल चुकी है।

परिवार को सरकारी योजनाओं का भी मिला है लाभ 

प्रशासनिक जांच में सामने आया कि बच्चों के पिता भरत सिंह परचून की दुकान चलाते हैं और मां सुनीता सिलाई का काम करती हैं। दोनों दिव्यांग हैं और उन्हें प्रदेश सरकार की दिव्यांग पेंशन का नियमित लाभ मिल रहा है। इसके अतिरिक्त परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 1 लाख रुपये की पहली किस्त भी जारी की जा चुकी है।

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