यूरोपीय संघ (ईयू) के नियामकों ने बृहस्पतिवार को टेक दिग्गज गूगल पर 8,800 करोड़ रुपये (890 मिलियन यूरो, लगभग एक अरब डॉलर) का भारी जुर्माना लगाया है। ईयू का आरोप है कि गूगल ने अपने सर्च इंजन और गूगल प्ले ऐप स्टोर का दुरुपयोग करते हुए प्रतिस्पर्धी कंपनियों को नुकसान पहुंचाया और अपनी सेवाओं को अनुचित तरीके से बढ़ावा दिया।
2017 से अब तक गूगल पर ईयू कितनी कार्रवाई कर चुका है?
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 से अब तक ईयू गूगल पर 10 अरब यूरो (करीब 11.38 अरब डॉलर) से अधिक का जुर्माना लगा चुका है। हाल के वर्षों में ईयू ने मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), एलीएक्सप्रेस तथा टिकटॉक जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर भी कड़े प्रतिबंध और भारी जुर्माने लगाए हैं।
गूगल पर प्रतिस्पर्धा खत्म करने का आरोप क्यों लगा?
यूरोपीय आयोग के अनुसार, गूगल ने दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन के रूप में अपनी मजबूत स्थिति का लाभ उठाया। कंपनी ने शॉपिंग, ट्रैवल, गेमिंग और भाषा अनुवाद जैसी अपनी सेवाओं को सर्च परिणामों में प्राथमिकता देकर सबसे ऊपर दिखाया, जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनियों की सेवाओं को नीचे धकेल दिया। आयोग का मानना है कि इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। उधर, गूगल के जनरल काउंसिल केंट वॉकर ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के बजाय उनके उत्पादों के मूल्य को कमतर आंकने वाला कदम है।
प्ले ऐप स्टोर को लेकर ईयू ने क्या आपत्तियां जताईं?
ईयू का कहना है कि गूगल ने प्ले ऐप स्टोर पर ऐसी अनुचित पाबंदियां लगाईं, जिनकी वजह से ऐप डेवलपर्स अपने उपयोगकर्ताओं से सीधे संपर्क नहीं कर सके। नियामकों का मानना है कि इससे डेवलपर्स की व्यावसायिक स्वतंत्रता प्रभावित हुई और प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ा।
ये भी पढ़ें: अमेरिका ने फिर फोड़ा टैरिफ बम: भारत समेत 17 देशों पर लगाया 10 फीसदी शुल्क, क्या पाकिस्तान का नाम भी है शामिल?
क्या इस फैसले का अमेरिका-ईयू व्यापार विवाद से कोई संबंध है?
यह कार्रवाई वर्ष 2022 में लागू हुए डिजिटल मार्केट्स एक्ट (डीएमए) के तहत की गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाए जाने पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं। ट्रंप प्रशासन यूरोपीय संघ पर नए टैरिफ लगाने के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, ईयू अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय पूरी जांच के बाद लिया गया है और इसका अमेरिका की व्यापारिक नीति या मौजूदा व्यापारिक तनाव से कोई संबंध नहीं है।




