
जम्मू की युवती ने जिस युवक के लिए अपने पति को छोड़ दिया। बाद में विदेश जाकर उसी ने शादी से इन्कार कर दिया। युवती का आरोप है कि विदेश से लौटने के बाद युवक फिर से उसका पीछा करने लगा। उसने युवक पर मारपीट और दुष्कर्म का भी आरोप लगाया। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले में 30 सितंबर को सबूत पेश करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत दो साल पुराने इस मामले की सुनवाई कर रही थी। मामले में नवाबाद पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64/331(6)/115(2) के तहत अपराध दर्ज है। सुनवाई के दौरान आरोपी मौजूद रहा। उसके खिलाफ चार्जशीट पेश की गई। हालांकि आरोपी ने सभी आरोपों से इन्कार किया। सहायक लोक अभियोजक ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान और जांच के दौरान इकट्ठा की गई अन्य सामग्री स्पष्ट रूप से केस में आरोपी की प्रथम दृष्टया संलिप्तता साबित करती है। इसलिए मामले में आगे बढ़ने के लिए इन अपराधों के लिए उस पर आरोप तय किया जाना आवश्यक है।
वहीं बचाव पक्ष के वकील ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 के तहत दर्ज पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास पाए। बचाव पक्ष का कहना था कि जिन गवाहों को परिस्थितिजन्य गवाह के रूप में पेश किया गया है, उनके बारे में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे किन परिस्थितियों को साबित करने वाले हैं। आरोपी के खिलाफ कोई विश्वसनीय प्रथम दृष्टया सबूत नहीं है। लिहाजा आरोपी को आरोपमुक्त कर चालान खारिज किया जाए। कोर्ट ने अभियोजन को सबूत पेश करने के लिए 30 सितंबर तारीख तय की है।
कोर्ट अभियोजन का पोस्ट ऑफिस नहीं
आरोपी के वकील और रिकॉर्ड पर मौजूद संबंधित सामग्री देखने के बाद कोर्ट ने कहा, इस चरण में कोर्ट से मामले की गहराई में जाने की उम्मीद नहीं की जाती। कोर्ट केवल पोस्ट ऑफिस या अभियोजन पक्ष की आवाज बनकर काम नहीं करेगा बल्कि मामले की व्यापक संभावनाओं, सबूतों के कुल असर और मामले में दिखाई देने वाली बुनियादी कमियों आदि पर भी विचार करेगा।




