
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर धार्मिक आयोजनों को लेकर पाबंदियां लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के ‘समर्पण वाले रवैये’ के कारण राज्य के कुछ हिस्सों में धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित हुई थी। कोलकाता के मिलन मेला प्रांगण में आयोजित ‘विजया सम्मिलनी’ कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। अधिकारी ने दावा किया कि पहले कई इलाकों में मूर्ति विसर्जन जुलूस निकालने और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाए गए थे, जबकि इस साल दुर्गा पूजा के दौरान ऐसी पाबंदियां नहीं रहीं।
उन्होंने अलीपुरद्वार के फालाकाटा, मुर्शिदाबाद के फरक्का, कोलकाता के गार्डन रीच, पूर्व मेदिनीपुर के कांथी स्थित खागरबनी और दक्षिण 24 परगना के कैनिंग, शिराकोल व भांगर का उल्लेख किया। ये आरोप उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में लगाए गए कथित प्रतिबंधों के संदर्भ में लगाए। उन्होंने कहा ‘धर्म व्यक्ति का अपना होता है, लेकिन त्योहार सभी के लिए होते हैं। अपने धर्म की रक्षा की जिम्मेदारी व्यक्ति की है।’
चोरबागान भगदड़ पर बोले- किसी को बचाया नहीं जाएगा
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में करीब 66 हजार दुर्गा पूजा आयोजित की गईं और चोरबागान की घटना को छोड़कर त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के दौरान 19 लोगों की मौत हो गई थी।
उन्होंने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि सबसे महत्वपूर्ण लोगों की जान जाना है। सरकार की प्रतिक्रिया से ज्यादा जरूरी इस त्रासदी की गंभीरता को समझना है। उन्होंने कहा कि सरकार न तो इसे मामूली घटना मानेगी और न ही इसे किसी साजिश का नतीजा बताएगी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के विजयादशमी संबोधन का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि घटना को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और इसमें मानवीय चूक की भूमिका को भी स्वीकार किया गया है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों को सरकार की ओर से संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में होगी जांच
मुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्गा पूजा आयोजन को सरकारी मंजूरी मिली थी। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से विचार-विमर्श के बाद जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को शामिल करते हुए समिति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के निष्कर्ष और सिफारिशें सार्वजनिक की जाएंगी। इन्हें पुस्तिका के रूप में पूजा समितियों के बीच भी वितरित किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद मिल सके।
अधिकारी ने सरकारी अस्पतालों से 25 घायलों को निजी अस्पतालों में स्थानांतरित करने के फैसले का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना प्राथमिकता थी और उन्हें केवल संस्थागत प्रतिष्ठा के कारण सरकारी अस्पतालों में नहीं रखा गया।
काली पूजा से गंगासागर मेले तक सुरक्षा की तैयारी
कार्यक्रम में मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई और घायलों के परिजनों को आर्थिक सहायता सौंपी गई। अधिकारी ने कहा कि 28 अक्तूबर को सरकारी कार्यालय खुलने के बाद काली पूजा, दिवाली, छठ पूजा और जगद्धात्री पूजा की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेष बैठकें शुरू होंगी। उन्होंने पूजा समितियों और प्रशासन से भीड़भाड़ वाले स्थानों तथा छठ घाटों पर विशेष सतर्कता बरतने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने गंगासागर मेले की तैयारियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप आयोजित करना चाहती है। वर्ष 2017 में जेटी ढहने से 17 श्रद्धालुओं की मौत की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन का ध्यान ऐसी त्रासदी दोबारा होने से रोकने पर रहेगा।




