
फ्रांस में बढ़ती महंगाई, जीवनयापन की बढ़ती लागत और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। देशभर में आयोजित प्रदर्शनों में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक करीब 4.10 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। राजधानी पेरिस में हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शनों की शुरुआत कई स्थानों पर शांतिपूर्ण तरीके से हुई, लेकिन बाद में कुछ शहरों में तनाव बढ़ गया। पुलिस और प्रशासन ने संभावित हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। फ्रांस में महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब शिक्षा, सामाजिक असमानता और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।
पेरिस में बिगड़े हालात, पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल
राजधानी पेरिस में शनिवार देर शाम प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ने की खबरें सामने आईं। भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए दंगा नियंत्रण पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रशासन ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए थे। अधिकारियों की कोशिश थी कि पिछले प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा जैसी स्थिति दोबारा पैदा न हो। पेरिस के अलावा ल्योन, लिली, मार्सिले, मोंटपेलियर, नांत और टूलूज जैसे प्रमुख शहरों में भी प्रदर्शन हुए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को बाधित करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया।
#WATCH | A large number of people protest across France against the rising cost of living; visuals from Paris. (Source: Reuters) https://t.co/TzNTfAfCJF
— ANI (@ANI) October 24, 2026
ल्योन और टूलूज में भी बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारी
फ्रांस के प्रमुख शहर ल्योन में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव देखने को मिला। स्थानीय प्रशासन के अनुमान के अनुसार, शहर में करीब 10,000 लोग विरोध मार्च में शामिल हुए। कुछ प्रदर्शन निर्धारित अनुमति और सभा संबंधी प्रतिबंधों के बावजूद जारी रहे। प्रशासन ने बताया कि शहर में अलग-अलग समूहों में प्रदर्शनकारी जुटे और कई स्थानों पर उनकी गतिविधियों को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण रहा।
वहीं, दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस के टूलूज शहर में स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, करीब 26,000 लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि महंगाई और सामाजिक मुद्दों को लेकर असंतोष केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के कई हिस्सों में इसका असर दिखाई दिया।
देशभर में 135 लोगों की गिरफ्तारी, कई आपत्तिजनक वस्तुएं जब्त
प्रदर्शनों के दौरान फ्रांस की पुलिस ने देशभर में 135 लोगों को गिरफ्तार किया। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरां नुनेज के अनुसार, सुरक्षा बलों ने विभिन्न प्रकार की संदिग्ध और हथियारनुमा वस्तुएं भी जब्त कीं। जब्त की गई वस्तुओं में धातु की गोलियां, पटाखे, गुलेल, एयरसॉफ्ट गन, कुछ अस्थायी हथियार और जापानी कटाना तलवार शामिल होने की जानकारी दी गई।
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री ने शुरुआती स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि उस समय तक कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई थी। हालांकि, दिन बढ़ने के साथ कुछ शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें आईं।
महंगाई के साथ शिक्षा व्यवस्था भी विरोध का बड़ा मुद्दा
फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आर्थिक दबाव के साथ शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें भी अहम हैं। इस आंदोलन की शुरुआत एक महीने से अधिक समय पहले छात्रों के प्रदर्शनों से हुई थी। छात्रों ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी, पढ़ाई के समय में बदलाव, स्कूलों की परिस्थितियों और सरकारी तथा निजी शिक्षा संस्थानों के बीच असमानता जैसे मुद्दे उठाए थे।
धीरे-धीरे इस आंदोलन में ट्रेड यूनियनों, सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और अन्य नागरिक समूहों की भागीदारी बढ़ती गई। इसके बाद विरोध का दायरा व्यापक हो गया और जीवनयापन की बढ़ती लागत भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गई।
ओरलियॉं में नेशनल रैली पार्टी के सम्मेलन के खिलाफ प्रदर्शन
फ्रांस के शहर ओरलियॉं में दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी के दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, दोपहर तक करीब 11,000 प्रदर्शनकारी वहां जुट चुके थे। प्रदर्शनकारियों में वामपंथी दलों के नेता, ट्रेड यूनियनों के सदस्य, छात्र समूह, सामाजिक कार्यकर्ता और गैर-सरकारी संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे। प्रदर्शन के दौरान मरीन ले पेन और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के खिलाफ नारे लगाए गए तथा दक्षिणपंथी राजनीति के विरोध में बैनर प्रदर्शित किए गए। इसी सम्मेलन के दौरान जॉर्डन बार्देला को नेशनल रैली पार्टी के अध्यक्ष के रूप में दोबारा चुने जाने की भी खबर सामने आई।
राष्ट्रपति मैक्रों ने बुलाई रक्षा परिषद की बैठक
देश के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों वाली रक्षा परिषद की बैठक बुलाई। इसका उद्देश्य मौजूदा स्थिति और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर चर्चा करना था। फ्रांस में जारी प्रदर्शनों ने सरकार के सामने महंगाई, आम लोगों की आर्थिक चिंताओं, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने जैसी कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।




