
11:24 AM, 25-Oct-2026
पैकेजिंग में आदिवासी कला की छाप
प्रधानमंत्री ने कहा, ”महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों ने अपने बनाए उत्पादों की पैकेजिंग पर बहुत ध्यान दिया है । यहां ‘शबरी नेचुरल्स’ के जरिए शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की छाप है । आपको जानकर खुशी होगी कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवार्ड’ मिला है। हमारे युवा भी इस क्षेत्र में नए प्रयोग कर रहे हैं | कर्नाटक का ‘बैंबू’ स्टार्टअप। बांस और खेती से निकलने वाले अवशेषों से पैकेजिंग मैटेरियल बना रहा है।”
11:21 AM, 25-Oct-2026
भारतीय किसानों के लिए खुल रहे नए बाजार
पीएम मोदी ने कहा, ”त्योहारों के इस मौसम में आप सभी ने अपने आस-पास एक बदलाव जरूर महसूस किया होगा | अब लोग खरीदारी करते समय स्वदेशी उत्पादों को बहुत महत्व देने लगे हैं | ‘वोकल फॉर लोकल’ की ये भावना अब हमारे उत्पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है। बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है। कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल अब मालदीव जा रही है, यानि, भारत के किसानों के लिए दुनिया में नए बाजार खुल रहे हैं।”
11:18 AM, 25-Oct-2026
टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को स्थानीय लोगों ने दिया नया जीवन
उन्होंने आगे कहा, ”हमारे यहां प्रकृति के प्रति सम्मान की बहुत पुरानी परंपरा रही है। हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि अपने आस-पास स्वच्छता रखना, जल-स्रोतों की देखभाल करना ये हमारी अपनी जिम्मेदारी है। मुझे खुशी होती है, जब मैं देखता हूं कि देश के कितने ही लोग इसी भावना को अपना जीवन बनाए हुए हैं। यही भाव उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में भी देखने को मिलता है। यहां लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है। ये नदी है ‘हेवल’।”
उन्होंने कहा, ”कुछ समय पहले हेवल नदी में पानी कम होने लगा था | आस-पास के प्राकृतिक जल-स्रोत भी सूख रहे थे। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों ने मिलकर हेवल नदी को बचाने का अभियान चलाया। इस दौरान बारिश का पानी रोकने के उपाय हुए, जमीन में पानी पहुंचाने के लिए काम हुआ और बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए | आज इस प्रयास से हेवल नदी को नया जीवनदान मिला है और साथ ही दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली है।”
11:14 AM, 25-Oct-2026
खेती विरासत मिशन का किया जिक्र
पीएम मोदी ने कहा, ”हमारे देश में ऐसे अनेक पारंपरिक हुनर हैं, जो पीढ़ियों से हमारी पहचान का हिस्सा रहे हैं, और सुखद ये है कि अब इन परंपराओं से जुड़कर अनेक नए प्रयोग भी हो रहे हैं, इन्हें आज के समय के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है। पंजाब में ऐसा ही एक प्रयास काफी समय से चल रहा है, यहां ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की एक संस्था ने आर्गेनिक फार्मिंग और पारंपरिक कृषि के तौर-तरीकों को नया जीवन देना शुरू किया। इस टीम के लोग पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना चाहते थे। इस पहल को नाम दिया गया ‘नव-त्रिन्जन’।”
उन्होंने कहा, ”इस पहल के तहत यहां बिना केमिकल का इस्तेमाल किए ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है । यहां प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है इससे तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अलग से केमिकल इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती । आप कल्पना कर सकते हैं, इससे पर्यावरण की कितनी बड़ी मदद हो रही है। साथियो, कुछ साल पहले ‘नव-त्रिन्जन’ ने एक वीविंग स्कूल भी शुरू किया | इसका लक्ष्य है बुनकरी के हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना | इस स्कूल ने भी बहुत सारी महिलाओं की लोगों की जिंदगी बदल दी है।”
11:12 AM, 25-Oct-2026
‘बिहार का मखाना पहुंच रहा ग्रीस’: मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी, और क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए। यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं कड़ी है। पीएम मोदी मे इस कार्यक्रम में कहा कि आज से 12 वर्ष पहले इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। इस यात्रा के सहयात्री और मार्गदर्शकआप ही हैं।
पीएम मोदी ने कहा, ”मेरे लिए मन की बात देश के लोगों के लोगों के परिश्रम, पराक्रम, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवा भाव का गौरवगान करने का शुभ अवसर रहा है। मेरे लिए मन की बात तीर्थ यात्रा की तरह है। 12 वर्षों में देश के हर कोने से ऐसे अनेक लोग सामने आए हैं जिनकी असाधारण कार्यों की ओर सामान्य रूप से समाज का ध्यान नहीं जाता । ‘मन की बात’ ने ऐसी अनगिनत प्रेरक कहानियों को आप सब के सामने लाने का काम किया है।”




