विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को नई दिल्ली में अफ्रीका दिवस समारोह को संबोधित करते हुए भारत और अफ्रीका के बीच गहरे ऐतिहासिक और वैचारिक संबंधों को रेखांकित किया। महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका के दिनों को जिक्र करते हुए जयशंकर ने नेल्सन मंडेला का प्रसिद्ध कथन दोहराया, आपने हमें मोहनदास गांधी दिए, हमने आपको महात्मा दिया। उन्होंने कहा कि गांधी जी के सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों ने क्वामे नक्रुमा, जुलियस न्येरेरे और नेल्सन मंडेला जैसे महान अफ्रीकी नेताओं को प्रेरित किया।
जयशंकर ने आगे कहा कि दोनों क्षेत्रों के संबंध उपनिवेशवाद विरोधी सिद्धांतों और साझा मूल्यों पर आधारित हैं। जयशंकर ने कहा कि मानसूनी हवाओं के जरिये हिंद महासागर ने सदियों से संस्कृति, विचारों और व्यापार के आदान-प्रदान में मदद की है। औपनिवेशिक दौर के साझा संघर्ष ने इस एकजुटता को और मजबूत किया। स्वतंत्रता के बाद दोनों क्षेत्र समान और संप्रभु भागीदार के रूप में आगे बढ़ रहे हैं।
भारत और अफ्रीका केवल व्यापार ही नहीं, संस्कृति से भी जुड़े रहे हैं?
जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर ने भारत और अफ्रीका को अलग नहीं, बल्कि जोड़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों के लोगों ने केवल वस्तुओं का ही नहीं, बल्कि संस्कृति, खान-पान, दर्शन, विश्वास, ज्ञान, लोककथाओं और जीवनशैली का भी आदान-प्रदान किया है। विदेश मंत्री ने कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान भारत और अफ्रीका के लोगों ने समान पीड़ा झेली और स्वतंत्रता तथा मानव गरिमा के लिए साथ मिलकर संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि यह साझी एकजुटता आज भी दोनों क्षेत्रों के संबंधों की मजबूत नींव बनी हुई है।
क्या गांधी के विचारों ने अफ्रीकी नेताओं को प्रेरित किया?
जयशंकर ने कहा कि महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों को विकसित किया। बाद में इन्हीं सिद्धांतों ने क्वामे नक्रूमा, जूलियस न्येरेरे और नेल्सन मंडेला जैसे अफ्रीकी नेताओं को प्रेरित किया। अपने संबोधन में जयशंकर ने नेल्सन मंडेला के उस प्रसिद्ध कथन को भी याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था, “आपने हमें मोहनदास गांधी दिए, हमने आपको महात्मा दिया।” उन्होंने इसे भारत और अफ्रीका के गहरे ऐतिहासिक और वैचारिक संबंधों का प्रतीक बताया।
अफ्रीका दिवस भारत के लिए भावनात्मक अवसर है?
जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका दिवस उनके लिए विशेष रूप से खुशी और एकजुटता का अवसर है। उन्होंने कहा कि यह दिन भारत और अफ्रीका के बीच गहरे भावनात्मक संबंधों को व्यक्त करने का अवसर भी है। अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने भारत आए 50 अफ्रीकी राजनयिकों का स्वागत किया, जो सुषमा स्वराज विदेश सेवा संस्थान में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की अफ्रीका के साथ दीर्घकालिक सहयोग और कूटनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।




