
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को आश्वासन दिया है कि हल्दिया में उसकी लंबे समय से लंबित विस्तार योजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने में राज्य सरकार मदद करेगी। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन अपनी रिफाइनरी के साथ पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स विकसित करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा कि विस्तार के लिए 175 एकड़ जमीन की जरूरत होगी। इनमें से 85 एकड़ जमीन हल्दिया विकास प्राधिकरण पहले ही उपलब्ध करा चुका है। बाकी जमीन श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्होंने बंदरगाह प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ यह मुद्दा उठाया है, ताकि आईओसी को उसकी प्रस्तावित विस्तार परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध हो सके। सरकारी तेल कंपनी आईओसी इस परियोजना को विचार के लिए अब अपने बोर्ड के समक्ष भेजेगी। कंपनी ने कहा है कि वह हल्दिया में विस्तार की संभावना पर विचार कर रही है, जिसमें डाउनस्ट्रीम केमिकल परियोजना भी शामिल हो सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल सरकार प्रत्यक्ष खरीद और लैंड पूलिंग समेत विभिन्न माध्यमों से औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता आसान बनाने की कोशिश कर रही है।
हल्दिया में पेट्रोकेमिकल परिसर विकसित करना चाहती है कंपनी
2023 में आईओसी के एक अधिकारी ने कहा था कि कंपनी हल्दिया रिफाइनरी से सटी जमीन पर एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स विकसित करना चाहती है। उनका कहना था कि केवल रिफाइनरी चलाना फायदे के लिहाज से टिकाऊ नहीं है और इसे पेट्रोकेमिकल कारोबार से जोड़ना जरूरी है। कंपनी ने कहा था कि वह हल्दिया में अपने पारादीप रिफाइनरी में अपनाए गए मॉडल को दोहराना चाहती है। पारादीप में रिफाइनरी के आसपास एक बड़ा पेट्रोकेमिकल इकोसिस्टम विकसित किया गया है।
लंबे समय से अटकी है विस्तार की योजना
हल्दिया में विस्तार के लिए जमीन की उपलब्धता लंबे समय से एक बड़ी बाधा बनी हुई है। साल 2021 में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रसायन एवं उर्वरक तथा पोत परिवहन मंत्रालयों के मंत्रियों को पत्र लिखकर हिंदुस्तान फर्टिलाइजर्स कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचएफसीएल) के पास मौजूद करीब 175 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के लिए हस्तक्षेप की मांग की थी। आईओसी ने यह भी बताया था कि हुगली नदी, रेलवे लाइनों, नहरों और सड़कों से घिरे होने के कारण रिफाइनरी का विस्तार करना मुश्किल है। ऐसे में पूर्वी हिस्से में मौजूद एचएफसीएल की जमीन विस्तार के लिए मुफीद है।
1975 में शुरू हुई थी हल्दिया रिफाइनरी
हल्दिया रिफाइनरी की शुरुआत 1975 में 25 लाख टन प्रति वर्ष की प्रारंभिक क्षमता के साथ हुई थी। बाद में इसका विस्तार किया गया और अब इसकी क्षमता करीब 90 लाख टन प्रति वर्ष है। रिफाइनरी से ईंधन, लुब्रिकेंट और विशेष उत्पाद तैयार किए जाते हैं।




