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चीन में बड़ा सैन्य फेरबदल:गलवां में भारत से भिड़े Pla कमांडर झाओ पर गिरी जिनपिंग की गाज, पार्टी से बाहर – China Expels Pla General Zhao Zongqi Who Led Forces During Doklam And Galwan Standoffs

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चीन ने अपनी सेना में बड़ा बदलाव करते हुए पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पूर्व वेस्टर्न थिएटर कमांड प्रमुख जनरल झाओ जोंगछी के खिलाफ कार्रवाई की है। झाओ ने 2020 में गलवां घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच हुई झड़प के दौरान पीएलए की कमान संभाली थी। उन्हें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता से भी हटा दिया गया है।

चीन की शीर्ष राजनीतिक सलाहकार संस्था चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (CPPCC) की स्थायी समिति ने झाओ को संगठन से बाहर करने का फैसला किया। उन्हें CPPCC की स्थायी समिति और जातीय एवं धार्मिक मामलों की समिति के उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है।

कौन हैं जनरल झाओ जोंगछी?

जनरल झाओ जोंगछी ने 2016 से 2020 तक PLA के वेस्टर्न थिएटर कमांड का नेतृत्व किया था। 2016 में सैन्य सुधारों के बाद जब इस थिएटर कमांड का गठन हुआ, तब झाओ इसके पहले कमांडर बनाए गए थे। इस कमांड के जिम्मे भारत-चीन सीमा से लगे बड़े हिस्से की निगरानी थी। उनके कार्यकाल के दौरान भारत और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण सीमा विवाद सामने आए।

डोकलाम से गलवान तक क्यों अहम रही झाओ की भूमिका?

झाओ जोंगछी के कार्यकाल में 2017 का डोकलाम गतिरोध और 2020 का गलवान संघर्ष भारत-चीन संबंधों के लिए बड़े सैन्य तनाव के रूप में सामने आए। 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस घटना में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने अपने सैनिकों के हताहत होने की संख्या सार्वजनिक रूप से सीमित रूप में बताई थी। झाओ ने 2020 के अंत में जनरल झांग शुदोंग को कमान सौंप दी थी। इसके बाद वह निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु तक पहुंचने के कारण पद से हट गए थे।

चीन के दो बड़े सैन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई क्यों हुई?

झाओ के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही चीन ने अपने सर्वोच्च सैन्य निकाय केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) से दो वरिष्ठ अधिकारियों झांग योउशिया और लियू झेनली को भी हटा दिया है। दोनों पर अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन के आरोपों को लेकर जांच की गई थी। झांग योउशिया राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद CMC में दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी और उपाध्यक्ष थे। वह चीन के शीर्ष राजनीतिक निकाय पोलित ब्यूरो के सदस्य भी रहे हैं। वहीं, लियू झेनली CMC के सदस्य और संयुक्त स्टाफ विभाग के प्रमुख थे।

क्या चीन की सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान तेज हुआ?

चीनी सेना लंबे समय से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के प्रमुख निशानों में रही है। 2012 में शुरू हुए इस अभियान के तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों और सैन्य कमांडरों की जांच हुई है और कई को पदों से हटाया गया है। पिछले महीने शी जिनपिंग ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को और मजबूत करने का आह्वान किया था।



चीन में कम्युनिस्ट पार्टी और राज्य के केंद्रीय सैन्य आयोग की संरचनाएं अलग-अलग हैं, हालांकि दोनों एक ही संस्थान की तरह काम करती हैं। शुक्रवार को हुई कार्रवाई राज्य के CMC से जुड़े पदों को लेकर थी। चीन की संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की ओर से जारी अद्यतन प्रतिनिधियों की सूची में झांग योउशिया और लियू झेनली के नाम भी हटा दिए गए हैं। इनके साथ 10 अन्य सांसदों के नाम भी सूची से हटाए गए।

हटाए गए अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों में CMC जनरल ऑफिस के पूर्व निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल झोंग शाओजुन और रणनीतिक सहायता बल के पूर्व कमांडर जनरल जू चिएनशेंग भी शामिल हैं। चीन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के खिलाफ हुई इन कार्रवाइयों को ऐसे समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब बीजिंग अपनी सेना में भ्रष्टाचार और अनुशासन से जुड़े मामलों पर लगातार सख्ती की बात कर रहा है।

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