
ट्रेन में सफर करते समय आपने कई बार सोचा होगा कि आखिर लोको पायलट घंटों तक ट्रेन चलाते हुए अपनी सामान्य जरूरतें कैसे पूरी करते हैं। खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में यह सवाल और भी दिलचस्प हो जाता है।
दरअसल, लोको पायलट जिस केबिन में बैठकर ट्रेन को नियंत्रित करते हैं, वहां यात्री कोच जैसा सामान्य टॉयलेट नहीं होता। ऐसे में सवाल खड़ा होना लाजमी है कि आखिर लोको पायलट वॉशरूम के लिए कहां जाते हैं? चलिए इस बारे में जानने की कोशिश करते हैं। आप आगे इस बारे में जान सकते हैं…

2 of 5
ट्रेन का लोको पायलट वॉशरूम कहां जाते हैं?
– फोटो : AdobeStock
- लोको पायलट के केबिन में वॉशरूम नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लोको पायलट पूरी यात्रा के दौरान अपनी जरूरतों को रोककर रखते हैं
- ट्रेन संचालन में निर्धारित स्टॉपेज और ड्यूटी की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं
- जरूरत पड़ने पर लोको पायलट ट्रेन को अपनी मर्जी से किसी भी जगह रोककर केबिन से बाहर नहीं जा सकते

3 of 5
ट्रेन का लोको पायलट वॉशरूम कहां जाते हैं?
– फोटो : AdobeStock
कैसे और कहां जाते हैं लोको पायलट वॉशरूम के लिए?
स्टेशन पर रुकना
- यदि ज्यादा जरूरत हो, तो वे कंट्रोल रूम को सूचना देकर अगले आने वाले स्टेशन पर ट्रेन रुकने की अनुमति मांगते हैं और स्टेशन के टॉयलेट का उपयोग करते हैं
- लोको पायलट वॉशरूम जाने के लिए कंट्रोल रूम या स्टेशन मास्टर से संपर्क करते हैं

4 of 5
ट्रेन का लोको पायलट वॉशरूम कहां जाते हैं?
– फोटो : AdobeStock
आधुनिक इंजनों में क्या टॉयलेट हैं?
- भारतीय रेलवे अब कुछ नए और आधुनिक इंजनों में वॉटलेस या बायो-टॉयलेट की सुविधा देने लगा है, जो ट्रेन के रुकने पर ही खुलते हैं

5 of 5
ट्रेन का लोको पायलट वॉशरूम कहां जाते हैं?
– फोटो : AdobeStock
घंटों की ड्यूटी में कैसे संभालते हैं?
- लोको पायलटों की ड्यूटी कई बार लंबी होती है
- विशेष रूप से मालगाड़ी संचालन में ड्यूटी की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं
- जरूरत पड़ने पर लोको पायलट वॉशरूम जाने के लिए कंट्रोल रूम या स्टेशन मास्टर से संपर्क करता है
- उनकी परमिशन के बाद ही वो वॉशरूम जा पाता है




