
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली के प्रस्ताव पर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश को तत्काल और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव सदन में पेश किया। प्रस्ताव सामने आते ही भाजपा विधायकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते सदन में तीखी नोकझोंक, नारेबाजी और धक्कामुक्की शुरू हो गई। विपक्षी विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़कर वेल में फेंक दीं।
हंगामे के बीच भाजपा के विधायकों ने प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ दीं और सदन के बीचों-बीच वेल में उतर आए। भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने वेल में एक कुर्सी उठाने की कोशिश की, लेकिन विधानसभा के मार्शलों ने तुरंत उन्हें काबू करने के बाद धकेलते हुए सदन से बाहर निकाल दिया। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के बार-बार विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील के बावजूद जब हंगामा शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने सदन की कार्यवाही को पहले 30 मिनट के लिए और बाद में सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
कांग्रेस ने उठाया सीईसी मुद्दा
इससे पहले सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सुबह की कार्यवाही की शुरुआत के तुरंत बाद ही कांग्रेस के सदस्य अपनी-अपनी सीटों से खड़े हो गए और निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में तीखी नारेबाजी करने लगे।
स्वायत्तता प्रस्ताव पर भड़का विरोध
सदन में हंगामे की मुख्य वजह पूर्ण राज्य के दर्जे से जुड़े प्रस्ताव की प्रस्तावना में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित विशेष दर्जे से संबंधित प्रस्ताव का उल्लेख रहा। साथ ही प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजने का संकल्प लिया गया है। जैसे ही मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पढ़ा तो सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया। वहीं, भाजपा विधायकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने कहा कि सदन में स्वायत्तता के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की चर्चा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सीएम बोले-यह मोदी की गारंटी थी, तो वादा अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ…सीएम उमर ने कहा, एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जहां नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे, मैंने राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया था। तब प्रधानमंत्री जी ने अपने भाषण में कहा था कि यह कोई साधारण वादा नहीं है, यह मोदी की गारंटी है। फिर यह वादा पूरा क्यों नहीं किया जा रहा है।





