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एमपी:दमोह में देसी शराब पीने से तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी, जिला अस्पताल रेफर; बंडा कांड के बाद भी सवाल – Damoh News: Three Hospitalized After Drinking Country Liquor In Hindoria

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पहले हिंडोरिया स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल दमोह रेफर कर दिया गया। घटना के बाद शराब की गुणवत्ता और उसकी बिक्री की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तबीयत बिगड़ने की वजह शराब में मिलावट थी या कोई अन्य कारण।

जानकारी के अनुसार, बेलखेड़ी निवासी घनश्याम ठाकुर (24), हल्ले ठाकुर और लक्ष्मी नारायण (20) ने कथित तौर पर सतरिया से देसी शराब खरीदी थी। शराब के सेवन के बाद तीनों की तबीयत बिगड़ गई। गुरुवार रात उन्हें उपचार के लिए हिंडोरिया स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक परीक्षण के बाद उनकी स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल दमोह रेफर कर दिया।

सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचे थाना प्रभारी

घटना की जानकारी मिलने पर हिंडोरिया थाना प्रभारी धर्मेंद्र गुर्जर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। उन्होंने मरीजों से बातचीत कर घटनाक्रम की जानकारी ली। बताया गया कि मरीजों ने शराब के अधिक सेवन के बाद तबीयत बिगड़ने की बात कही है। पुलिस ने मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई है। हालांकि, तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारण की पुष्टि चिकित्सकीय रिपोर्ट और जांच के बाद ही हो सकेगी।

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बंडा शराब कांड के बाद भी निगरानी पर सवाल

शराब के सेवन के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं आबकारी व्यवस्था और शराब की बिक्री पर निगरानी को लेकर सवाल खड़े करती हैं। सागर जिले के बंडा में सामने आए शराब कांड के बाद भी ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं। हालांकि, हिंडोरिया के इस मामले में फिलहाल शराब के अवैध या मिलावटी होने की पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में यह जांच जरूरी है कि शराब कहां से खरीदी गई थी, संबंधित विक्रेता अधिकृत था या नहीं और शराब की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं। इसके साथ ही शराब की बिक्री और निगरानी व्यवस्था की भी पड़ताल की जानी चाहिए, ताकि किसी भी संभावित लापरवाही का समय रहते पता लगाया जा सके।

जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

फिलहाल तीनों लोगों की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारण का पता लगाना प्राथमिकता है। पुलिस और संबंधित विभाग की जांच में शराब के स्रोत तथा गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जांच में अवैध बिक्री, मिलावट या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

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