
पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों के बीच राजस्थान कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर असंतोष सामने आने लगा है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य और राजस्थान युवा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सीताराम लांबा की सोशल मीडिया पोस्ट ने पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। लांबा ने टिकट वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपनी ही पार्टी की व्यवस्था पर निशाना साधा है।
लांबा ने लिखा कि यदि जिला परिषद और पंचायत समिति के टिकटों के असली मालिक केवल वर्तमान विधायक और विधानसभा चुनाव हार चुके पूर्व प्रत्याशी ही हैं, तो पार्टी संगठनों और कार्यकर्ताओं के दफ्तरों पर ताले लगा देने चाहिए। उनके इस बयान को पंचायत चुनावों में टिकट वितरण को लेकर संगठन के भीतर मौजूद असंतोष के रूप में देखा जा रहा है।
संगठनात्मक व्यवस्था पर उठाए सवाल
सीताराम लांबा भारतीय युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के माध्यम से जमीनी राजनीति से जुड़े रहे हैं। उनकी पोस्ट से टिकट वितरण में संगठन के पदाधिकारियों और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। लांबा के बयान का संकेत है कि पंचायत चुनावों में टिकट तय करने की प्रक्रिया में स्थानीय ब्लॉक और जिला कांग्रेस कमेटियों की भूमिका सीमित हो रही है। पार्टी के लिए लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं की अनदेखी और कुछ नेताओं के प्रभाव में टिकट वितरण की व्यवस्था को लेकर असंतोष सामने आया है।
विधायकों और पूर्व प्रत्याशियों की भूमिका पर सवाल
लांबा के बयान के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। इसे पंचायत चुनावों में टिकट वितरण के दौरान वर्तमान विधायकों और पिछले विधानसभा चुनाव में हार चुके प्रत्याशियों के प्रभाव पर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है। टिकट वितरण में यदि कुछ नेताओं की सिफारिशों को प्राथमिकता मिलती है, तो ब्लॉक और जिला स्तर पर काम करने वाले संगठनात्मक पदाधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो सकती है। हालांकि, लांबा की पोस्ट में किसी नेता का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया गया है।
कार्यकर्ताओं के मनोबल का मुद्दा
पार्टी के लिए रैलियों और चुनावी गतिविधियों में जुटने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट वितरण के दौरान पर्याप्त महत्व नहीं मिलने की शिकायतें अक्सर सामने आती रही हैं। ऐसे में पंचायत चुनावों के टिकटों को लेकर असंतोष कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है।
टिकट नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ताओं के चुनाव प्रचार से दूरी बनाने या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने की आशंका भी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सीताराम लांबा की पोस्ट ने राजस्थान कांग्रेस में संगठन की भूमिका और टिकट वितरण की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।



