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Jabalpur News:सैंपल भेजा था सागर तो जबलपुर एफएसएल कैसे दे सकता है टेस्टिंग रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा – The Sample Was Sent To Sagar, So How Can The Jabalpur Fsl Provide The Testing Report?

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टेस्टिंग के लिए सैंपल सागर भेजा गया था, लेकिन रिपोर्ट एफएसएल जबलपुर की ओर से तैयार की गई। हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने टेस्टिंग रिपोर्ट को खामीपूर्ण मानते हुए तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि एफएसएल टेस्टिंग का काम अयोग्य लोगों को सौंपा गया है और वैज्ञानिक बिना सोचे-समझे रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर रहे हैं या फिर टेस्ट करने वाले वैज्ञानिक ही अयोग्य हैं।

युगलपीठ ने इस संबंध में अतिरिक्त प्रमुख सचिव, गृह विभाग तथा संचालक, एफएसएल को दो सप्ताह में हलफनामा पेश करने के आदेश दिए हैं। युगलपीठ ने कहा कि हलफनामा दाखिल करने से पहले संबंधित अधिकारी रिकॉर्ड देख सकते हैं। साथ ही जांच अधिकारी को अगली सुनवाई के दौरान हलफनामे के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। अपील पर अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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हत्या के मामले में सजा के खिलाफ दायर हुई थी अपील

हत्या के अपराध में कटनी जिला न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ आकाश गौड़ सहित पांच लोगों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि पेश की गई एफएसएल रिपोर्ट में गंभीर खामी है।

एफएसएल जबलपुर की ओर से पेश की गई आर्टिकल-जी की रिपोर्ट में खून पाए जाने की बात कही गई थी। कटनी पुलिस अधीक्षक की ओर से भेजे गए कम्युनिकेशन के अनुसार, उक्त आर्टिकल को जांच के लिए सागर एफएसएल भेजा गया था। ऐसे में सवाल उठा कि जब आर्टिकल को सागर भेजा गया था तो उसकी टेस्टिंग रिपोर्ट जबलपुर एफएसएल से कैसे जारी हुई?

युगलपीठ ने कहा कि इस स्थिति में रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है। ऐसी रिपोर्ट के आधार पर इंसानी जिंदगी से जुड़े मामलों में फैसला नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट पर असिस्टेंट केमिकल एग्जामिनर डॉ. दीप्ति श्रीवास्तव के हस्ताक्षर हैं। अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने एफएसएल रिपोर्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विजीत साहू ने पैरवी की।

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