पीएम मोदी की घोषणा के बाद इस मामले में सबसे पहला फास्ट ट्रैक कोर्ट दिल्ली में गठित कर दिया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार रात इसकी अधिसूचना जारी कर दी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र उपाध्याय ने दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा की जज अनु ग्रोवर बलिगा को फास्ट ट्रैक कोर्ट का जज नियुक्त किया है। बंगाल, महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के निर्देश दिए गए हैं। पेपर लीक के दो मामले बॉम्बे, जबकि अन्य मामले कोलकाता, दिल्ली व मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र से जुड़े हैं।
नीट पेपर लीक मामले में युवाओं के आक्रोश और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बीच सरकार फास्ट ट्रैक मोड में आ गई है। बृहस्पतिवार की सुबह से लेकर देर रात तक सरकार ने ताबड़तोड़ कई घोषणाएं और फैसले किए। सबसे पहले सुबह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का एलान करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, दोषी किसी भी हाल में बख्शे नहीं जाएंगे। युवाओं का कल्याण और हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इस घोषणा के बाद सरकार में गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में उच्च स्तर पर बैठकों के कई दौर चले और देर रात होते-होते दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। हालांकि सरकार की तत्परता यहीं नहीं रुकी। छात्रों के प्रदर्शन की गाज उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी पर गिरी।
पीएम मोदी के करीबी अधिकारियों में गिने जाने वाले जोशी को सरकार ने पंचायती राज विभाग के सचिव के रूप में तबादला कर दिया और पशुपालन सचिव नरेश गंगवार नए उच्च शिक्षा सचिव बना दिए गए। टीके अनिल कुमार नए शिक्षा सचिव बनाए गए हैं। इसके बाद, आधी रात के करीब पीएम मोदी ने तीसरी बड़ी घोषणा की। उन्होंने एक्स पर वीडियो संदेश पोस्ट कर कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून बनाने जा रही है। खास बात यह है कि पीएम मोदी ने इसी मानसून सत्र में यह कानून लाने का एलान किया।
विरोध जारी
इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा में जवाबदेही के मुद्दे पर कोई बात नहीं की गई। पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर नहीं छोड़ने का एलान किया।
पीएम मोदी के एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधान की एक तस्वीर साझा की। इस पर लिखा था, हाय, मेरा कोई नाम नहीं है। वहीं सीजेपी ने पोस्ट किया कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह अच्छी बात है कि डेढ़ महीने के विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री ने आखिरकार इस पर ध्यान दिया। शायद उनके विदेश दौरे खत्म हो गए हैं और वे भारत लौट आए हैं, जो कि एक अच्छी बात है। लेकिन पेपर लीक हो जाने के बाद आप क्या सजा दे रहे हैं? इससे पेपर लीक की समस्या हल नहीं होगी। असली सवाल यह है कि पेपर लीक हो ही क्यों रहे हैं। इस सवाल का जवाब मिलना चाहिए।




