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पीएम मोदी ने लालकिले से सप्तधारा का आह्वान किया
– फोटो : Amar Ujala Graphics
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लाल किले से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने सप्तधारा का विजन देश के सामने रखा। पीएम मोदी ने कहा, ‘आने वाले दिनों में भी हम नेक्स्ट लेवल रिफॉर्म की तरफ बढ़ने वाले हैं। सभी को अपने पारंपरिक व्यवस्था, सोच और लक्ष्यों में सुधार करना होगा। हमें अपने किसान, मजदूरों को नई दिशा में लेकर चलना होगा। विकसित भारत बनने के लिए हमें नई धारा चाहिए। आज लाल किले की प्राचीर से मैं देश में शक्ति की सप्तधारा का आह्वान करता हूं। जो पांच दशक में नहीं हुआ, वह 5-7 साल में करने के लिए नई ऊर्जा देंगे। इसमें युवाओं की शक्ति भी जोड़ी जाएगी।’ आइए जानते हैं क्या हैं सप्तधारा की शक्तियां-

क्या है सप्तधारा का विजन
- प्रधानमंत्री ने कहा, ‘सप्तधारा की पहली शक्ति है उत्पादन की शक्ति। हमें मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना होगा। प्रोडक्शन के साथ हमें छोटे-छोटे पुर्जे बनाने हैं और बड़े उत्पाद भी बनाने हैं। पूरी वैल्यू चेन पर हमारा अधिकार होना चाहिए। डिजाइन से उत्पादन तक भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बनना होगा। उत्पादन के क्षेत्र में जो लोग हैं, यह उनके लिए अवसर है। इसलिए हमें क्वालिटी और स्केल में वैश्विक मानदंडों पर खरा उतरना होगा। हमारे प्रोडक्ट यूजर फ्रेंडली हों, हमारे प्रोडक्ट लोगों को लुभाने वाले हों। जीरो डिफेक्ट उत्पाद हमारी पहचान हों, यह तय करना होगा। वैश्विक मार्केट में हमारी पहचान गुणवत्ता के आधार पर होगा। क्वालिटी में नो कॉम्प्रोमाइज। हमारा लक्ष्य क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी होना चाहिए।’

- ‘सप्तधारा की दूसरी शक्ति है- कृषि और फूड प्रोसेसिंग। हमारे किसानों के लिए दुनिया के बाजार खुल चुके हैं। एफटीए के जरिए हमें दुनिया के बाजार में पहुंचना है। हमारे उत्पाद ग्लोबल ब्रांड बनने चाहिए। हमारे किसान केमिकल फ्री खेती को बढ़ावा देंगे और दुनिया में इसकी मांग बढ़ने वाली है।हमारे खान-पान, मिलेट्स, हमारे मसाले दुनियाभर में इनकी मांग होनी चाहिए। ‘
- पीएम मोदी ने कहा, ‘मेरी सप्तधारा की तीसरी शक्ति है तकनीक और इनोवेशन। ‘आज जमाना एआई, क्वांटम, स्पेस, डेटा सेंटर का है। इमर्जिंग तकनीक हर पल हमें चुनौती दे रही है। इसलिए देश को इनोवेशन का हब बनना है। अब भारत को डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है। भारत को नेक्सट जनरेशन कम्युनिकेशन तकनीक में लीड करना है। मेड इन इंडिया तकनीक दुनिया के हर कोन में पहुंचे, ये हमारा प्रयास होना चाहिए।’
- ‘सप्तधारा की चौथी शक्ति है- गतिशक्ति। हमें शहरों को हाई स्पीड ट्रेनों से जोड़ना होगा। यह गतिशक्ति हमें देश में सीमलेस कनेक्टिविटी चाहिए। हमें मॉडर्न सड़क चाहिए, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी चाहिए। पोर्ट्स को डेवलपमेंट ग्रोथ की दिशा में बढा़ना होगा। हमें एयरपोर्ट्स, पोर्ट्स चाहिए।’

- पीएम मोदी ने कहा, ‘पांचवी शक्ति है- रक्षा शक्ति। डिफेंस में आत्मनिर्भर होना, डिफेंस में आत्मनिर्भर होने के बिना कोई चारा नहीं है। आज भारत विश्व के लिए बाजार बनकर नहीं रह सकता और हमें रक्षा निर्माण में खुद को मजबूत करना होगा। हमें हाइपरसोनिक मिसाइट तकनीक पर काम करना होगा। साइबर सुरक्षा भी रक्षा का क्षेत्र है, जिसमें हमें सामर्थ्य हासिल करना है। दुनिया ने समझ लिया इसके बिना कोई चारा नहीं है। हमें डिफेंस के क्षेत्र में भी बाजार बनना होगा। हमें डिफेंस प्रोडक्ट्स की चेन बनना होगा। ड्रोन और एंटी ड्रोन सिस्टम को देखना होगा।’
- ‘छठी शक्ति है- ऊर्जा शक्ति। हमें हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ना है। दुनिया जब ग्लोबल वॉर्मिंग की चर्चा करती है तो हम इस ओर आगे बढ़ते हैं। भारत एक ग्रीन मूवमेंट का वाहक बन रहा है। हमारी कोस्टलाइन बहुत मजबूत है। इसमें हम आगे बढ़ सकते हैं। कितने ही क्षेत्र हैं, जिनमें हम आगे बढ़ सकते हैं।
- ‘सातवीं शक्ति है- भारत का सॉफ्ट पावर। भारत के सॉफ्ट पाव की ताकत है। आज योग ने दुनिया को भारत से जोड़कर रखा है। जिस भारत के पास आयुर्वेद हो, आस्था के केंद्र हों। हमारी फिल्में हों, हैंडलूम हों, हमारी गेमिंग हों, वीएफएक्स हो, डिजिटल कंटेंट हो। क्रिएटिव वर्ल्ड के अंदर भारत का लोहा माना जा रहा है। भारत का ऑडियो-वीडियो औऱ एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में दुनिया हमारी राह देखती है। हमारे पास वन संपदा है, 100 से ज्यादा नेशनल पार्क हैं। लेकिन विदेशियों को आकर्षिक करने में हम पीछे रहे हैं। हमारा काम है कि हम इस क्षेत्र में आगे बढ़ें और पूरी दुनिया को आकर्षित करें।’



