Search
Home » नेशनल » Ragging Cases:रैगिंग के मामलों में यूपी देश में सबसे आगे, आखिर सख्ती के बावजूद क्यों नहीं थम रहीं शिकायतें? – Uttar Pradesh Tops India In Ragging Cases Complaints Despite Strict Ugc Rules

Ragging Cases:रैगिंग के मामलों में यूपी देश में सबसे आगे, आखिर सख्ती के बावजूद क्यों नहीं थम रहीं शिकायतें? – Uttar Pradesh Tops India In Ragging Cases Complaints Despite Strict Ugc Rules

Share Now :

WhatsApp
Share This

देश में रैगिंग रोकने के लिए लगातार सख्ती की जा रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश अब भी इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के बावजूद वर्ष 2022 से 22 जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश के मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की 825 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें वर्ष 2026 में 22 जुलाई तक 135 शिकायतें शामिल हैं। यह आंकड़ा देश में सबसे अधिक है और रैगिंग रोकने के प्रयासों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

देशभर से मिले आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से 22 जुलाई 2026 तक कुल 4,024 रैगिंग शिकायतें दर्ज की गईं। इस सूची में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इसके बाद पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार का स्थान है। खास बात यह है कि तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या अधिक होने के बावजूद वहां शिकायतों की संख्या उत्तर प्रदेश की तुलना में कम रही। वर्ष 2025 में यूजीसी ने रैगिंग रोकने में विफल रहने पर 18 मेडिकल कॉलेजों समेत 107 संस्थानों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था।

ये भी पढ़ें- ‘यह सम्मान नहीं, बर्बादी का जश्न’: संसद में धर्मेंद्र प्रधान के अभिनंदन पर राहुल गांधी का तंज, सरकार को घेरा

उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में कितने मामले दर्ज हुए?

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2022 में 97, वर्ष 2023 में 154, वर्ष 2024 में 188, वर्ष 2025 में 251 और वर्ष 2026 में 22 जुलाई तक 135 शिकायतें दर्ज की गईं। मध्य प्रदेश में इसी अवधि में क्रमशः 73, 82, 87, 117 और 63 मामले सामने आए। राजस्थान में 32, 42, 54, 75 और 44 शिकायतें दर्ज हुईं। दिल्ली में 18, 26, 31, 33 और 27 मामले सामने आए। उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में भी अलग-अलग स्तर पर शिकायतें दर्ज की गईं।






























































































राज्य 2022 2023 2024 2025 2026*
उत्तर प्रदेश 97 154 188 251 135
मध्य प्रदेश 73 82 87 117 63
राजस्थान 32 42 54 75 44
दिल्ली 18 26 31 33 27
उत्तराखंड 19 28 25 49 21
हरियाणा 8 22 28 48 19
पंजाब 18 9 22 25 13
जम्मू-कश्मीर 15 18 14 17 6
हिमाचल प्रदेश 5 12 9 14 4
चंडीगढ़ 0 1 0 1 2

पूर्वोत्तर के राज्यों ने रैगिंग कैसे रोकी?

रिपोर्ट के अनुसार, सिक्किम, मिजोरम, नगालैंड और मणिपुर ने रैगिंग रोकने के मामले में अलग उदाहरण पेश किया है। इन राज्यों में पहली शिकायत सामने आते ही प्रशासन, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समूहों ने मिलकर तेजी से काम किया। सीनियर और जूनियर छात्रों के बीच बेहतर संवाद और मेलजोल बढ़ाया गया। साथ ही 11वीं और 12वीं कक्षा से ही छात्रों को रैगिंग विरोधी कानूनों और उसके परिणामों की जानकारी दी गई। इसका असर यह हुआ कि इन चारों राज्यों में अब रैगिंग की शिकायतों का आंकड़ा शून्य पर पहुंच गया है।

यूजीसी की सख्ती के बावजूद चुनौती क्यों बनी हुई?

यूजीसी लगातार संस्थानों को रैगिंग रोकने के निर्देश देता रहा है। इसके बावजूद कुछ राज्यों में शिकायतों की संख्या कम नहीं हो रही है। वर्ष 2025 में 107 संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना इस बात का संकेत है कि कई संस्थानों में नियमों का प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, जिन राज्यों ने जागरूकता, निगरानी और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया, वहां सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

Published On

Leave a Comment

Other News