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ईरान युद्ध का असर:ट्रंप बोले- चुनाव के बाद ही गिरेंगे तेल के दाम; रिपब्लिकन खेमे की क्यों बढ़ी चिंता? – Trump Says Oil Prices That Spiked Because Of Iran War Likely Won’t Come Down Until After Midterms

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान युद्ध की वजह से बढ़े तेल के दाम जल्द नीचे आने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में गिरावट अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बाद ही शुरू हो सकती है।

तेल के दाम कितने बढ़े?

बुधवार को तेल की कीमतों में 3 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। जुलाई के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। इस्राइल और अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध के बीच दोनों तरफ से हमले तेज हुए हैं।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने कहा, चुनाव के तुरंत बाद तेल की कीमतें तेजी से नीचे जाएंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि इसमें मध्यावधि चुनाव से थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है। ट्रंप यह बात डलास जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कह रहे थे। वह वहां मध्यावधि चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी के सम्मेलन में जाने वाले थे।

युद्ध कब खत्म होगा?

ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि अमेरिका में अहम चुनाव होने के बाद ईरान आखिरकार पीछे हट जाएगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान चाहता है कि चुनाव में कमजोर लोगों का एक समूह सत्ता में आए। इसके बाद ईरान को अकेला छोड़ दिया जाए और उसे परमाणु हथियार बनाने दिए जाएं। ट्रंप ने कहा, मुझे लगता है कि चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म हो जाएगा, क्योंकि ईरान अब ज्यादा देर तक नहीं टिक सकता।

युद्ध कब तक चलने की उम्मीद थी?

युद्ध की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि यह कुछ हफ्तों तक चलेगा। लेकिन अब इस संघर्ष को सात महीने हो चुके हैं। अमेरिका और इस्राइल के ईरान के खिलाफ युद्ध से खाड़ी देशों से तेल की आवाजाही काफी धीमी हो गई है। युद्ध से पहले दुनिया का करीब 20 फीसदी पेट्रोलियम होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था।

तेल की कीमतों से ट्रंप पर दबाव क्यों?

ट्रंप की इस टिप्पणी से साफ हुआ है कि युद्ध की स्थिति को लेकर उनकी सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। युद्ध का अंत अभी नजर नहीं आ रहा है। वहीं, अमेरिका में पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं। महंगाई भी बढ़ रही है। इससे ट्रंप की रिपब्लिकन सरकार पर कीमतों को काबू करने का दबाव बढ़ गया है।

ट्रंप ने पिछले हफ्ते क्या कहा था?

ट्रंप ने पिछले हफ्ते युद्ध को ‘छोटी बात’ बताया था। लेकिन रिपब्लिकन नेताओं की चिंता बढ़ रही है। उन्हें डर है कि युद्ध का असर चुनाव में मतदाताओं पर पड़ सकता है। खासकर पेट्रोल के बढ़े दाम और महंगाई लोगों के लिए बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।

अमेरिका ने तेल का भंडार क्यों खोला?

अमेरिका ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल निकालना शुरू किया है। अगस्त की शुरुआत में इस भंडार में तेल की मात्रा 30 करोड़ बैरल से नीचे चली गई थी। 2026 की शुरुआत से इसमें 10 करोड़ बैरल से ज्यादा की कमी आ चुकी है।

मध्यावधि चुनाव कब हैं?

ट्रंप ने कहा है कि युद्ध 3 नवंबर के बाद ही खत्म हो सकता है। यह बात उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पिछले हफ्ते दिए बयान के बाद आई है। वेंस ने यह कहने से इनकार किया था कि युद्ध मध्यावधि चुनाव तक खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा था कि वह युद्ध खत्म होने के लिए ‘कृत्रिम समय सीमा’ तय नहीं करना चाहते।

वेंस ने युद्ध को लेकर क्या कहा?

वेंस ने कहा कि जब उनसे पूछा जाता है कि युद्ध कब खत्म होगा, तो यह पूछने जैसा है कि ईरानी जहाजों पर हमला करना कब बंद करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें इस सवाल का जवाब नहीं पता। वेंस के मुताबिक, इसका जवाब ईरान से ही पूछा जाना चाहिए।

अमेरिका में पेट्रोल कितना महंगा हुआ?

बुधवार को अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत करीब 96 डॉलर प्रति बैरल थी। पेट्रोल की कीमत भी रातोंरात तेजी से बढ़ी। एएए के मुताबिक, सामान्य पेट्रोल की औसत कीमत 7 सेंट बढ़कर 4.22 डॉलर प्रति गैलन हो गई। यह पिछले साल इसी समय की कीमत से 1 डॉलर से ज्यादा महंगी है।

डीजल के दाम क्यों बढ़े?

डीजल की कीमतों का असर आम लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है। इसका इस्तेमाल सामान ढोने और उत्पादन में बड़े स्तर पर होता है। शुक्रवार को डीजल की कीमत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद भी कीमतें बढ़ती रहीं। एक गैलन डीजल की औसत कीमत रातोंरात 9 सेंट बढ़कर 5.94 डॉलर हो गई।

हवाई यात्रा भी महंगी हुई?

जेट ईंधन की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। इसका असर अमेरिका और दूसरे देशों की एयरलाइंस पर पड़ा है। कई एयरलाइंस ने उड़ानों की संख्या कम कर दी है। साथ ही किराए और दूसरी फीस बढ़ा दी गई है।

तेल बाजार में फिर हलचल क्यों हुई?

अमेरिकी सेना ने बताया कि उसने पांच ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया है। यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर मिसाइल हमले की कोशिश के जवाब में की गई। इसके अलावा ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमले में सऊदी अरब की तेल सुविधाओं में आग लग गई। इन घटनाओं के बाद तेल बाजार में फिर बड़ी हलचल देखने को मिली।

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