अमर उजाला ने जो आशंका जताई थी वह सही साबित हुई। बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों को संवेदनशील पाकिस्तान बॉर्डर और आसपास के जिलों में बसाने की साजिश का बड़ा पर्दाफाश रविवार को हुआ। सुरक्षा एजेंसियों ने रामबन जिले के बनिहाल में रविवार शाम करीब 6:30 बजे जांच के दौरान 21 बांग्लादेशी घुसपैठियों को हिरासत में लिया। इनमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। सत्यापन में किसी के भी पास भारत में वैध प्रवेश अथवा यहां रहने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं मिला। प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश व नेपाल से भी जुड़ाव मिला है। गोरखपुर, देवीपाटन व लखनऊ मंडल में घुसपैठ कराने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने असम के रास्ते अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारत में प्रवेश किया। इसके बाद न्यू जलपाईगुड़ी, कटिहार, बरौनी, मुगलसराय, लखनऊ, कानपुर और दिल्ली होते हुए जम्मू तवी तक पहुंचे। वहां से सड़क मार्ग से कश्मीर जा रहे थे, जहां उनके रहने, मकान और काम का बंदोबस्त करने का दावा किया गया था। पूछताछ के बाद सभी को रामबन पुलिस को सौंप दिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों ने बांग्लादेशियों के भारत में घुसपैठ के मार्ग, संभावित मददगार और नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वे कब और किन परिस्थितियों में भारत में दाखिल हुए और जम्मू-कश्मीर तक पहुंचने में उन्हें स्थानीय स्तर पर किसने मदद की। मामले में हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से भी मदद मांगी गई है। उनसे भी कार्रवाई का इनपुट साझा किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों ने इनको पकड़ा
इमरान अहमद (18), मुस्तकीम अहमद (15), शुहाग अहमद (17), रूबिया बेगम (22), जहीर अहमद (03), जहीन अहमद (07), लीजा बेगम (20), फातिमा (06), मोहम्मद फहीम (02), अकलीमा बेगम (18) सभी बांग्लादेश के जिला सिलहट, रानीगंज व सुनामगंज के रहने वाले हैं। वहीं, मोहम्मद अलाउद्दीन (38), मोहम्मद अयाज अली (32) व सुहेल अहमद (28) से सभी बांग्लादेश के सिलहट जिले के सुनामगंज स्थित सैदगांव के निवासी हैं। रहीमउद्दीन (23), मोहम्मद आलमगीर (19) व रेहान अहमद (14) सिलहट जिले के सुनामगंज स्थित सैदपुर के रहने वाले हैं। केवसार अहमद (26), राजुल करीम (22) ये दोनों पश्चिम रुकनपुर के रहने वाले हैं। रासिल अहमद (29), सहजुद्दीन अहमद (19), सबीर (19) सिलहट के रहने वाले हैं।
21 लोगों में कौन-कौन
- पुरुष 11
- महिलाएं 04
- बच्चे 06
- कुल 21
(इनमें छह नाबालिग हैं। सबसे छोटा बच्चा मात्र दो वर्ष और सबसे बड़ा नाबालिग 17 वर्ष का है।)
घुसपैठियों से सुरक्षा एजेंसियों के सवाल
- सीमा कहां से पार की?
- कितने दिन पहले भारत आए?
- जम्मू तक किसने पहुंचाया?
- कश्मीर में किसके पास जाना था?
- क्या पहले भी आ चुके हो?
- बसने के लिए आखिर कश्मीर ही क्यों?
सबसे बड़ा सवाल…सीमा से बनिहाल तक कोई नहीं रोक पाया?
जांच का सबसे अहम पहलू यह होगा कि क्या ये सभी लोग अपने स्तर पर भारत पहुंचे या फिर इनके पीछे मानव तस्करी अथवा घुसपैठ कराने वालों का कोई संगठित गिरोह सक्रिय है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि सीमा पार कराने, यात्रा की व्यवस्था करने और कश्मीर तक पहुंचाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही। यदि यह नेटवर्क सामने आता है तो जांच का दायरा केवल इन 21 लोगों तक सीमित नहीं रहेगा। इस सब के बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बांग्लादेश सीमा पार कर ये बनिहाल तक पहुंच गए और कोई इन्हें रोक नहीं पाया।




