
राजस्थान के चर्चित एसडीएम थप्पड़ कांड के आरोपी नरेश मीणा बुधवार को उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद टोंक जेल से बाहर आ गए। समर्थकों ने जेल के बाहर उनका जोरदार स्वागत किया। रिहाई के बाद नरेश मीणा ने मीडिया से बातचीत में न्यायपालिका पर अपना विश्वास दोहराया।
मीणा ने कहा कि वे न्यायपालिका पर हमेशा से विश्वास रखते हैं और उन्होंने पूर्व में मिली जमानत की सभी शर्तों का पालन किया था। उन्होंने बताया कि वे कई धरनों और प्रदर्शनों से लगातार दूर रहे लेकिन झालावाड़ में स्कूल हादसे के दौरान बच्चों की मौत के बाद खुद को रोक नहीं पाए। झालावाड़ में उन्होंने केवल शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया था। नरेश मीणा ने अपने समर्थकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके जेल में रहने के दौरान समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया और उनका साथ दिया।
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हाईकोर्ट ने दी सशर्त जमानत
जस्टिस अनिल उपमन की अदालत ने मंगलवार को नरेश मीणा को सशर्त जमानत दी। अदालत ने निर्देश दिया कि नरेश मीणा को हर महीने के पहले सप्ताह में संबंधित थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके अलावा वे किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं होंगे और रिहाई के बाद समाज में अपनी छवि का महिमामंडन नहीं करेंगे।
इससे पहले टोंक की एससी-एसटी अदालत ने जमानत की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देकर उनकी जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद नरेश मीणा ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था। गौरतलब है कि देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान 13 नवंबर 2024 को समरावता गांव में निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारा था। इसके बाद समरावता तथा आसपास के इलाकों में आगजनी और तोड़फोड़ हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।




