

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला
पश्चिम एशिया संकट के कारण पंजाब के बासमती चावल निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पिछले साल का चावल अभी तक पूरी तरह निर्यात नहीं हो पाया है, जबकि खरीफ सीजन का नया बासमती भी मंडियों में पहुंचने लगा है। करीब 15 लाख मीट्रिक टन नया बासमती निर्यात के लिए तैयार है। दूसरी ओर, होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने से समुद्री भाड़ा छह गुना तक बढ़ गया है। जिस निर्यात में पहले सात दिन लगते थे, अब उसमें एक महीने तक का समय लग रहा है। इससे निर्यातकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पंजाब में करीब 30 लाख मीट्रिक टन बासमती का उत्पादन होता है, जिसमें से लगभग 15 लाख टन बासमती तैयार होता है। इसका करीब 80 प्रतिशत हिस्सा दूसरे देशों को निर्यात किया जाता है। प्रदेश की मिलों में अभी भी पिछले साल का दो लाख टन चावल पड़ा है, जबकि एक लाख टन चावल का निर्यात अधर में है। इस तरह कुल तीन लाख टन चावल का निर्यात अटका हुआ है। अब नई फसल आने से निर्यातकों के सामने पुराने स्टॉक को निकालने और नए चावल के लिए जगह बनाने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
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