
जटिल जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही 15 वर्षीय तन्वी को सर्जरी के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ा। एम्स, नई दिल्ली में इलाज करा रही तन्वी की एक सितंबर को मौत के बाद परिवार ने आरोप लगाया है कि समय पर ऑपरेशन नहीं होने से उसकी हालत बिगड़ती गई। पिता मुकेश परियानी का दावा है कि 2015, 2016 या 2017 में सर्जरी हो जाती तो बेटी की जान बचाई जा सकती थी। मामले में एम्स प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है।
परिवार के अनुसार, तन्वी का इलाज एम्स में वर्ष 2012 में शुरू हुआ था। 10 अक्तूबर 2012 को कार्डियोलॉजी ओपीडी में जांच के बाद उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (वीएसडी) विद पल्मोनरी एट्रेशिया जैसी जटिल जन्मजात हृदय बीमारी का पता चला। इसके बाद कई जांच और विशेषज्ञों से परामर्श हुए। पिता के मुताबिक, करीब एक साल बाद उन्हें डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया और ऑपरेशन की उम्मीद बंधी। परिवार ने 4 अप्रैल 2014 को पैसे और खून समेत जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी कर दी थीं।
सितंबर 2015 की सर्जरी भी टली
मुकेश परियानी का आरोप है कि सितंबर 2015 में सर्जरी की तारीख तय की गई थी, लेकिन बाद में दीपावली के बाद ऑपरेशन करने की बात कहकर इसे टाल दिया गया। इसके बाद परिवार कई बार अस्पताल पहुंचा, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में भी शिकायत की। परिवार का दावा है कि शिकायत के बाद अस्पताल बुलाकर शिकायत वापस लेने की शर्त पर ऑपरेशन की बात कही गई।
परिवार के अनुसार, 2018, 2023 और 2025 में भी तन्वी की जांच और चिकित्सकीय परामर्श होते रहे, लेकिन सुधारात्मक सर्जरी नहीं हुई। जुलाई 2025 में संबंधित चिकित्सक के अवकाश पर होने के कारण दवा से बीमारी नियंत्रित रखने और नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई। फरवरी 2026 में परिवार ने फिर शिकायत दर्ज कराई।





