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‘कर्नाटक सरकार किसानों के साथ’:सीएम शिवकुमार ने किन वादों-फैसलों का जिक्र किया, कस्तूरीरंगन रिपोर्ट में क्या? – Karnataka Kasturirangan Report Farmers Shivakumar

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पश्चिमी घाट के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर कर्नाटक में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट का मुद्दा फिर गरमा गया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शनिवार को चिक्कमगलूरू के बालेहोन्नूर में किसानों और जनप्रतिनिधियों से कहा कि सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगी। केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को सातवां मसौदा जारी किया था, जिसमें पश्चिमी घाट के बड़े हिस्से को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव है। इस पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। कर्नाटक सरकार पहले भी केंद्र के ऐसे मसौदों को खारिज करती रही है।

कर्नाटक में कितने इलाके पर असर पड़ने की बात?

मसौदे में छह राज्यों के कुल 56,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव है। कर्नाटक में 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इसके दायरे में आएगा। इसमें 10 जिलों के 33 तालुक और 1,449 गांव शामिल हैं। किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों की चिंता है कि इसका असर खेती, आजीविका और भविष्य के विकास पर पड़ सकता है।

अहम आंकड़े और फैसले


20,668 वर्ग किमी: कर्नाटक में प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र।

33 तालुक: मसौदे के दायरे में आने वाले तालुकों की संख्या।

1,449 गांव: राज्य के इतने गांव प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल हैं।

56,000 वर्ग किमी: छह राज्यों में प्रस्तावित कुल पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र।

27 जुलाई 2026: केंद्र ने सातवां मसौदा जारी किया।

तीन दिन: सोमवार से कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर विशेष विधानसभा सत्र।

124 तालुक: अब तक कर्नाटक में सूखाग्रस्त घोषित किए गए तालुक।

किसानों को मुख्यमंत्री ने क्या भरोसा दिया?

सीएम शिवकुमार ने कहा कि पहले से जमीन पर खेती कर रहे किसानों को परेशान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबित भूमि अधिकार से जुड़े आवेदनों के निपटारे के लिए कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नए अतिक्रमण की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने वन विभाग को पहले से खेती कर रहे किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की बात कही।

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रिपोर्ट पर सरकार आगे क्या कदम उठाएगी?

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की चिंताओं को देखते हुए जरूरी कानूनी संशोधनों पर विचार करेगी। केरल की तर्ज पर प्रभावित इलाकों का भौतिक सर्वे कराने और उच्चस्तरीय समिति बनाने के सुझाव पर भी विचार होगा। सरकार इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा करेगी और जरूरत पड़ी तो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को केंद्र के पास ले जाएगी। सोमवार से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के साथ सूखे की स्थिति पर भी चर्चा होगी।

स्थानीय नेताओं और संगठनों की क्या मांग है?

बैठक में अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने रिपोर्ट की कमियों और उसके संभावित असर का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि क्षेत्र में पहले से ही कई संरक्षित इलाके हैं और वन संबंधी पाबंदियों के कारण किसान परेशान हैं। उन्होंने केरल की तरह भौतिक सर्वे कराने, मालnad-तटीय क्षेत्र को विशेष कृषि क्षेत्र के रूप में मान्यता देने और पानी के लिए अलग आवंटन की मांग की। उनका कहना है कि यह क्षेत्र कर्नाटक की कई प्रमुख नदियों का स्रोत है। प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से सांसदों के साथ सर्वदलीय बैठक और केंद्रीय वन मंत्री की मौजूदगी में भी बैठक बुलाने की मांग की।

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